मरीजों-तीमारदारों सहित डॉक्टरों को इंफेक्शन से बचाएगा ये मेडिकल कॉलेज, इस रणनीति को धरातल पर उतारने की तैयारी

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नाहन : हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर का डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल प्रबंधन अब मरीजों, तीमारदारों सहित डॉक्टरों को इंफेक्शन से बचाने के लिए हर संभव इंतजाम करेगा. मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इसको लेकर पूरी रणनीति तैयार कर ली है.

बता दें कि हाल ही में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल प्रबंधन की हॉस्पिटल इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिन्हें प्रबंधन की तरफ से धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी गई है. अधिकतर इंफेक्शन हाथों के माध्यम से ही फैलता है. मरीज के तीमारदार अस्पताल आते हैं, जो अस्पताल में रैलिंग सहित परिसर में खड़े होकर दाएं-बाएं टच करते हैं, जिसके बाद वह अस्पताल के अंदर आकर या बाहर मरीज को भी टच करते हैं.

इसी तरह से डाक्टर और मेडिकल स्टाफ भी एक मरीज के बाद दूसरे व अन्य मरीजों को टच करते हैं. इस तरह से हाथों के माध्यम से एक दूसरे में इंफेक्शन फैलता है.

मेडिकल कॉलेज नाहन के सीनियर मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अजय पाठक ने बताया कि इस गंभीर समस्या को देखते हुए हॉस्पिटल इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी ने निर्णय लिया है कि अस्पताल में जगह-जगह हैंड हाइजीन की एसओपी को लगाया जाए. साथ ही हैंड सैनिटाइजेशन के भी पुख्ता इंतजाम किए जाएं.

उन्होंने बताया कि हालांकि हैंड सैनिटाइजेशन की सुविधा अस्पताल में मौजूद है, लेकिन जहां पर उपलब्ध नहीं है, वहां भी इसका इंतजाम किया जाएगा. इसके अलावा मरीजों और उनके तीमारदारों को भी इस दिशा में जागरूक किया जाएगा. चूंकि, हाथों की स्वच्छता से ही संक्रमण से बचाव होता है. खांसी, जुकाम, और फ्लू जैसे श्वसन संबंधी रोग आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं. लिहाजा, अस्पताल में आने वाले लोगों को यह मालूम हो कि हैंड हाइजीन कितना जरूरी है.

डॉक्टर का एप्रन पहनना होगा अनिवार्य
डॉ. अजय पाठक ने कहा कि अस्पताल में अक्सर ये भी देखने में आता है कि चेकअप के दौरान अक्सर मरीज डाक्टर पर खांस या छींक देते हैं. कई बार ड्रेसिंग आदि करने पर पस आदि भी स्टाफ पर गिर जाती है. लिहाजा, हॉस्पिटल इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी ने यह भी निर्णय लिया है कि डॉक्टर अस्पताल में उन अधिकतर स्थानों पर एप्रन पहने, जहां पर मरीजों से इंफेक्शन फैलने की अधिक संभावना रहती है, ताकि इंफेक्शन से डॉक्टर, स्टाफ सहित उनके परिवार भी सुरक्षित रहे.

नीडल स्टिक इंजरी से बचाव को लेकर लगेंगे ट्रेनिंग सेशन
डॉ. पाठक ने कहा कि बैठक में यह भी तय किया गया कि नीडल स्टिक इंजरी से बचाव को लेकर भी उचित कदम उठाए जाए. इसके तहत मेडिकल स्टूडेंट्स, इंटर्न या नर्सिंग स्टूडेंट्स के लिए ट्रेनिंग सेशन भी लगाए जाएंगे. चूंकि, कई बार संबंधित स्टूडेंट्स और इंटर्न के हाथ इतने सधे हुए नहीं होते. ऐसे में ब्लड लेने या स्टीच आदि के लिए जो नीडल इस्तेमाल हो रही है, वह उनकी उंगली में चुभ जाती है. इससे इन्हें इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. इससे एचआईवी और हेपेटाइटिस-बी संक्रमण फैलने की संभावना रहती है. इसी के मद्देनजर इनके ट्रेनिंग सेशन करवाने का फैसला लिया गया है.

मेडिकल वेस्ट पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता
बता दें कि किसी भी अस्पताल से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट बहुत डेजरेंस होता है. हालांकि मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में नियमों के मुताबिक इसका उचित तरीके से डिस्पोजल किया जा रहा है, लेकिन उपरोक्त बैठक में निर्णय लिया गया कि इस दिशा में और अधिक विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है.