नाहन|
FDR Road: एफडीआर (फुल डेफ्थ रिक्लामेशन) टैक्नीक से बनने वाली जमटा-बिरला सड़क का कार्य शुरू हो गया है. ये नाहन विधानसभा क्षेत्र और डिवीजन की पहली सड़क होगी, जिसका निर्माण इस टैक्नीक से होगा. 21.330 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर 19.15 करोड़ रुपए खर्च होंगे. बड़ी बात ये है कि इस टैक्नीक से सड़क की लाइफ शैल 15-20 वर्ष तक बनी रहेगी. इससे न तो पहाड़ दरकने का खतरा होगा और ना ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा. ये पूरी तरह से ईको फ्रैंडली सड़क होगी. इस टैक्नीक में सड़क से निकलने वाले मेटीरियल को यहीं रिसाइकल कर इस्तेमाल में लाया जाएगा.
बता दें कि जिला सिरमौर में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) 3 के तहत एफडीआर टैक्नीक से इस सड़क के अपग्रेडेशन का कार्य किया जा रहा है. मंगलवार को लोक निर्माण विभाग के एसई अरविंद कुमार शर्मा, एक्सईएन आलोक जनवेजा, एसडीओ दलीप सिंह समेत अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में इस सड़क के 100 मीटर पैच का ट्रायल किया गया. इसके बाद इसकी रिपोर्ट्स आएंगी. इसी आधार पर पूरी सड़क का निर्माण किया जाएगा.
ट्रायल के दौरान महिंद्र सिंह कंस्ट्रक्शन के सीएमडी मुकेश शर्मा और सतबीर सिंह भी मौजूद रहे. इस सड़क के ट्रायल पैच का शुभारंभ एसई अरविंद कुमार शर्मा ने नारियल फोड़कर किया.
बढ़ जाएगी सड़क की चौड़ाई
जमटा-बिरला सड़क की चौड़ाई मौजूदा समय में 3.05 मीटर है, जिसे बढ़ाकर 3.75 मीटर किया जाएगा. यानी तारकोलयुक्त इस सड़क की चौड़ाई पहले से 70 सेंटीमीटर अधिक बढ़ जाएगी. इसके बनने से इस सड़क पर सफर बेहद मजेदार हो जाएगा. सड़क पर वाहनों को पास देने में चालकों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा. ये सड़क न केवल मजबूत होगी, बल्कि टिकाऊ भी होगी.
मौके पर पहुंची है भारी मशीनरी
इस सड़क के निर्माण के लिए महिंद्र सिंह कंस्ट्रक्शन की भारी मशीनरी मौके पर पहुंची है. सड़क के निर्माण से पहले इसके चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है. सड़क किनारे निकासी नालियों के साथ साथ पुलिया और डंगों आदि का निर्माण भी होना है. पिछले तीन माह से कंस्ट्रक्शन कंपनी सड़क के अपग्रेडेशन कार्य में जुटी है.
सिरमौर में इस टैक्नीक से बनेंगी तीन सड़कें

जिला सिरमौर में एफडीआर टैक्नीक से बनने वाली तीन सड़कों को मंजूरी मिली है. इस टैक्नीक से सड़कों का अपग्रेडेशन होगा. पांवटा साहिब में इसका ट्रायल किया जा चुका है. जमटा-बिरला सड़क पर इस एफडीआर का दूसरा ट्रायल है. ये एक जर्मन टैक्नालॉजी है. इस प्रक्रिया में पहले सीमेंट का इस्तेमाल होता है. बड़ी बात ये है कि सड़क निर्माण के लिए उसी मेटीरियल को रिसाइकल कर इस्तेमाल किया जाता है.
-ई. अरविंद कुमार शर्मा, एसई लोक निर्माण विभाग सिरमौर
नाहन डिवीजन की है पहली सड़क

इस टैक्नीक में सड़क के ही मेटीरियल की स्ट्रेंथ को इंप्रूव किया जाता है. ये ईको फ्रैंडली टैक्नालॉजी है. लिहाजा, इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. इस टैक्नीक से निर्मित सड़कें काफी टिकाऊ और मजबूत होती हैं. इसका ट्रायल लिया गया है. इसकी रिपोर्ट के बाद उसी आधार पर निर्माण होगा. अंतिम चरण में तारकोलयुक्त सड़क बनाई जाएगी. एक से डेढ़ माह के भीतर इस सड़क का निर्माण किया जाएगा. इस टैक्नीक में पहाड़ों को नुकसान नहीं पहुंचता. ये सड़क नाहन डिवीजन की पहली सड़क है, जिसका निर्माण एफडीआर टैक्नीक से किया जाएगा. इसकी लाइफ शैल 15-20 वर्ष की होगी.
-ई.आलोक जनवेजा, एक्सईएन नाहन डिवीजन
क्या है एफडीआर टैक्नालॉजी

उत्तरप्रदेश में सबसे पहले एफडीआर टैक्नीक के तहत सड़कें बनाई गई हैं. अब हिमाचल में भी इस टैक्नालॉजी को अपनाया जा रहा है. इस टैक्नीक में सबसे पहले पूरी सड़क को मशीनों से डिस्मेंटल किया जाता है. इसके बाद सड़क से ही निकाले गए मेटीरियल को ग्रैडर मशीन से मिलाकर पैडफुट रोलर से समतल किया जाएगा. फिर सीमेंट और कैमिकल मिलाकर सॉयल कंपेक्टर से सड़क गहराई को मजबूत आधार में बदला जाएगा. सड़क के अंतिम चरण में फाइनल टच पीटीआर मशीन से दिया जाएगा. ये सड़क 22 टन से अधिक दाब क्षमता सहने में सक्षम होगी. जमटा-बिरला सड़क के ट्रायल पैच के साथ साथ रामपुरघाट में भी इसका ट्रायल हो चुका है. शिलाई में भी इसी टैक्नीक से सड़क बनाई जाएंगी.
– सीएमडी मुकेश शर्मा, महिंद्र सिंह कंस्ट्रक्शन