शिमला : केंद्र से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद हिमाचल सरकार ने आय बढ़ाने के नए विकल्प तलाशने तेज कर दिए हैं। करीब 26 साल बाद राज्य में लॉटरी फिर शुरू करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार को उम्मीद है कि लॉटरी चालू होने पर हर साल 75 से 100 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।

लॉटरी बहाली के लिए सरकार ने मंत्रिमंडलीय उप-समिति गठित कर दी है। इसकी अध्यक्षता उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह और नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी सदस्य हैं। कोषागार के निदेशक को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है और इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर 18 मार्च से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में लॉटरी शुरू करने का विधेयक पेश किया जा सकता है। विधेयक पारित होने पर राज्य में लॉटरी औपचारिक रूप से बहाल हो जाएगी। समिति नियमों का मसौदा तैयार करने के साथ निविदा दस्तावेज भी बनाएगी।
प्रदेश में लॉटरी पर रोक वर्ष 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने सामाजिक दुष्प्रभावों का हवाला देते हुए लगाई थी। उस समय कहा गया था कि आसान कमाई के लालच में कई परिवार आर्थिक संकट में फंस रहे थे और युवाओं व महिलाओं पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा था।
मौजूदा मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकार ने पिछले वर्ष जुलाई में मंत्रिमंडल की बैठक में लॉटरी फिर शुरू करने का फैसला लिया था। अब अगले वित्तीय वर्ष से केंद्र की सहायता पूरी तरह बंद होने और प्रदेश पर एक लाख चार हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज होने के कारण अतिरिक्त संसाधन जुटाना सरकार की प्राथमिकता बन गया है।
देश के कई राज्यों में लॉटरी से अच्छी आय हो रही है। पड़ोसी पंजाब ने पिछले वर्ष लॉटरी से 230 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त किया, जबकि केरल में यह आंकड़ा हर साल लगभग एक हजार करोड़ रुपये के आसपास रहता है। हिमाचल सरकार भी इसी मॉडल के जरिये अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है।


