जानिए क्या है ‘सिक्किम सुंदरी’, आनंद महिंद्रा की एक पोस्ट ने जिस पर खींचा देश का ध्यान

सिक्किम सुंदरी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि संघर्ष, सहनशीलता और प्रकृति की अद्भुत शक्ति का प्रतीक है। ऊंचे पहाड़ों के बीच जब यह पूरी तरह खिलता है, तो सचमुच ऐसा लगता है मानो बर्फ और चट्टानों के बीच कोई चमकता हुआ स्तंभ खड़ा हो।

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पूर्वी हिमालय की बर्फीली चोटियों और तेज हवाओं के बीच उगने वाला एक दुर्लभ पौधा इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। सिक्किम में पाए जाने वाले इस अनोखे पौधे को स्थानीय लोग सिक्किम सुंदरी कहते हैं, जबकि इसका वैज्ञानिक नाम र्यूम नोबाइल है। हाल ही में पर्यटक रतन सिंह सोनल द्वारा बनाए गए एक वीडियो को साझा करते हुए मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इसे “धैर्य की मास्टरक्लास” बताया, जिसके बाद यह पौधा एक बार फिर लोगों की नजरों में आ गया है।

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सिक्किम सुंदरी पूर्वी हिमालय की 4,000 से 4,800 मीटर की ऊंचाई पर पनपती है, जहां तापमान अक्सर शून्य से नीचे चला जाता है और तेज हवाएं लगातार चलती रहती हैं। इसे ‘ग्लासहाउस प्लांट’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी पारदर्शी पत्तियां प्राकृतिक ग्रीनहाउस की तरह काम करती हैं। ये पत्तियां ठंडी हवाओं और तेज अल्ट्रावायलेट किरणों से अंदर मौजूद नाजुक फूलों की रक्षा करती हैं। हिमालय के वीरान और बर्फीले परिदृश्य में यह पौधा दूर से चमकते हुए एक मीनार जैसा दिखाई देता है।

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इस पौधे का जीवन चक्र इसे और भी खास बनाता है। सिक्किम सुंदरी एक मोनोकार्पिक पौधा है, यानी यह अपने पूरे जीवन में सिर्फ एक बार फूल खिलाता है। 7 से 30 साल तक यह जमीन के पास छोटी पत्तियों के रूप में जीवित रहता है और कठिन हालातों में धीरे-धीरे ऊर्जा संचित करता है। इसके बाद एक अंतिम प्रयास में यह लगभग दो मीटर तक ऊंचा हो जाता है, पगोडा के आकार का फूल खिलाता है, बीज फैलाता है और फिर अपना जीवन समाप्त कर देता है। इतनी लंबी प्रतीक्षा के बाद खिलने वाला यह फूल इसे प्रकृति का धैर्यपूर्ण चमत्कार बना देता है।

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यह दुर्लभ पौधा मुख्य रूप से उत्तर सिक्किम के ऊंचे ट्रेकिंग मार्गों, अल्पाइन दर्रों और हिमनदी घाटियों में पाया जाता है। इसका दर्शन बेहद सीमित समय के लिए ही संभव होता है, जिससे यह प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए और भी आकर्षक बन जाता है। स्थानीय समुदाय इसकी सुंदरता और मजबूती की सराहना करता है। पारंपरिक ज्ञान में इसका औषधीय उपयोग भी बताया जाता रहा है, हालांकि अब इसे सख्ती से संरक्षित किया जाता है और केवल दूर से देखने की अनुमति है।

आनंद महिंद्रा की पोस्ट ने इस सवाल को भी सामने रखा कि लोग दूरदराज के देशों की वनस्पतियों के बारे में ज्यादा जानते हैं, जबकि अपने ही देश में मौजूद ऐसी अद्भुत प्राकृतिक धरोहरों से अनजान रहते हैं। सिक्किम में इको-टूरिज्म और संरक्षण को लेकर बढ़ती जागरूकता के चलते अब सिक्किम सुंदरी धीरे-धीरे अपनी पहचान बना रही है।

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वैज्ञानिकों के अनुसार यह पौधा बेहद सीमित इलाकों में उगने वाली अनोखी प्रजातियों में से एक है। इसकी बनावट और जीवन शैली इसे अन्य पौधों से अलग बनाती है। कठोर जमीन, जमा देने वाली ठंड और लगातार चलने वाली हवाओं के बावजूद यह पौधा खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाल लेता है। इसके ऊपरी हिस्से में मौजूद पतली और पारदर्शी ब्रैक्ट्स सूरज की रोशनी को भीतर रोककर गर्मी को कैद कर लेती हैं, जिससे फूल सुरक्षित रहते हैं।

सिक्किम सुंदरी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि संघर्ष, सहनशीलता और प्रकृति की अद्भुत शक्ति का प्रतीक है। ऊंचे पहाड़ों के बीच जब यह पूरी तरह खिलता है, तो सचमुच ऐसा लगता है मानो बर्फ और चट्टानों के बीच कोई चमकता हुआ स्तंभ खड़ा हो।