पश्चिम बंगाल में विशेष पुनरीक्षण अभियान के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख नाम हटा दिए हैं, जिसने राज्य की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या पिछले वर्ष अक्तूबर के अंत में मौजूद 7.66 करोड़ मतदाताओं के आधार पर 11.85 प्रतिशत से अधिक बैठती है। फिलहाल अंतिम मतदाता आधार की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।
आयोग के आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि सबसे अधिक प्रभाव मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में देखने को मिला, जहां न्यायिक जांच के दायरे में आए 11.01 लाख मतदाताओं में से 4.55 लाख नाम हटा दिए गए। बांग्लादेश सीमा से सटे उत्तर 24 परगना जिले में भी बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर हुए, जहां 5.91 लाख की जांच में से 3.25 लाख से अधिक मतदाता अयोग्य पाए गए। मालदा जिले में भी 8.28 लाख में से 2.39 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए।
प्रतिशत के लिहाज से नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में स्थिति और भी चौंकाने वाली रही, जहां सुनवाई के बाद क्रमशः 77.86 प्रतिशत और 55.08 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। इन इलाकों में हिंदू नामशुद्र मतुआ समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति है। राजधानी कोलकाता के दक्षिण क्षेत्र में भी 28 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल है।
इसी बीच केरल, पुडुचेरी और असम में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार थम चुका है और 9 अप्रैल को मतदान होना है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि 9 अप्रैल सुबह 7 बजे से 29 अप्रैल शाम 6:30 बजे तक एग्जिट पोल के प्रसारण पर रोक रहेगी। इस अवधि में एग्जिट पोल आयोजित या प्रसारित करना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126ए का उल्लंघन माना जाएगा, जिसके तहत दो साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग कराई जाएगी।
