राज्यव्यापी विराट रैली में सिरमौर से सीटू के हजारों कार्यकर्ता लेंगे हिस्सा : आशीष

0
नाहन|
सीटू जिला कमेटी सिरमौर की विस्तारित मध्यावधि समीक्षा बैठक इंदु तोमर की अध्यक्षता में सिरमौर में सम्पन्न हुई. बैठक में सीटू राज्य उपाध्यक्ष जगतराम, आशीष कुमार, वीना शर्मा, रिज़वान, माया, गुड्डो, बंसी चंद, देव कुमारी और लेखराज आदि शामिल रहे.
बैठक में निर्णय लिया गया कि केंद्र की मोदी सरकार व प्रदेश सरकार की मजदूर, किसान, कर्मचारी व जनता विरोधी नीतियों के खिलाफ मार्च 2025 में बजट सत्र में शिमला विधानसभा पर प्रस्तावित राज्यव्यापी विराट रैली में सिरमौर जिला से सीटू के हजारों कार्यकर्ता भाग लेंगे. मार्च में संभावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को हिमाचल प्रदेश में पूर्ण रूप से सफल बनाया जाएगा.
बैठक को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेश उपाध्यक्ष जगत राम,  महासचिव आशीष कुमार, जिला कोषाध्यक्ष वीना शर्मा ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार की नवउदारवादी व पूंजीपति परस्त नीतियों के कारण बेरोजगारी, गरीबी, असमानता व रोजी रोटी का संकट बढ़ रहा है. बेरोजगारी व महंगाई से गरीबी व भुखमरी बढ़ रही है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कमज़ोर करने के कारण बढ़ती महंगाई ने जनता की कमर तोड़ कर रख दी है.
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी, मिड डे मील व आशा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने, ग्रेच्युटी लागू करने, मजदूरों का न्यूनतम वेतन 26 हज़ार रुपए घोषित करने, मजदूर विरोधी चार लेबर कोडों, नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन, अग्निवीर, आयुद्धवीर, कोयलावीर व अन्य फिक्स टर्म रोज़गार को रद्द करने, ईपीएफ, ईपीएस, ईडीएलआई सुविधा की अवहेलना करने पर सज़ा शर्तों में कटौती करने, असंगठित मजदूरों के लिए सार्वभौमिक व्यापक सामाजिक सुरक्षा देने, ठेका मजदूरों की रोज़गार सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें नियमित कर्मियों के बराबर वेतन देने आदि मांगों को लेकर सीटू मजदूरों व जनता के बीच जाएगी और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज करने का आह्वान किया जाएगा.
ये भी हैं मांगें
• केंद्रीय व प्रदेश सरकार के बोर्ड व निगम कर्मियों की ओपीएस बहाल करना
• न्यूनतम पेंशन 9 हज़ार लागू करने, मनरेगा व निर्माण मजदूरों के श्रमिक कल्या बोर्ड से आर्थिक लाभ व पंजीकरण सुविधा बहाल करना
• एसटीपी मजदूरों के लिए शेड्यूल एम्प्लॉयमेंट घोषित करना, आउटसोर्स व अस्पताल कर्मियों के लिए नीति बनाना
• औद्योगिक मजदूरों को 40 प्रतिशत अधिक वेतन देना
• काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 करने के खिलाफ, आईटी, आईटीईएस उद्योगों को श्रम कानूनों से छूट देने के खिलाफ, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने, स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों कल लागू करना
• शहरी क्षेत्रों में विस्तार के साथ ही मनरेगा में 600 रुपए प्रति दिन की मजदूरी पर 200 दिन कार्य दिवस प्रदान करना, मनरेगा, निर्माण और मनरेगा मजदूरों का श्रमिक कल्याण बोर्ड में पंजीकरण व आर्थिक लाभ बहाल करना
• आउटसोर्स कर्मियों के लिए नीति बनाना, प्रदेशभर में नौकरी से निकाले गए सैकड़ों कोविड कर्मियों को बहाल करना
• भारी महंगाई पर रोक लगाना, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को रोकना, किसानों की कर्ज़ा मुक्ति