नाहन|
श्री रेणुका जी बांध परियोजना से विस्थापित होने वाले परिवारों के लिए पांवटा साहिब के टोकियो में खरीदी जमीन की वीरवार को डिमार्केशन की गई. इस दौरान बांध प्रबंधन और राजस्व विभाग के पटवारी कानूनगो सहित रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति के पदाधिकारी भी मौजूद रहे. डिमार्केशन के बाद समिति ने जमीन के चयन को लेकर कई सवाल उठाए और कहा कि ये जमीन रहने लायक नहीं है.
रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति के संयोजक विनोद ठाकुर और प्रेस सचिव योगेश ठाकुर ने बताया कि टोकियो में खरीदी जमीन की जब डिमार्केशन हुई तो पता चला ये खड्ड के साथ है. उन्होंने कहा कि टोकियो में पहले ये जमीन कहीं और दिखाई गई थी, जिसके लिए विस्थापितों ने हामी भी भरी थी. लेकिन वीरवार को जिस जमीन की डिमार्केशन हुई, ये किसी भी सूरत में रहने लायक नहीं है.
उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान यहां खड्ड उफान पर रहता है. इसका चैनेलाइजेशन नहीं हुआ है. बरसात के दौरान ये जमीन बाढ़ की चपेट में आ सकती है. उन्होंने कहा कि 90 फीसदी जमीन खड्ड में है, जो विस्थापितों के साथ बड़ा धोखा है. पदाधिकारियों ने कहा कि उन्होंने इस जमीन की वीडियोग्राफी भी की है. साथ ही स्थानीय लोगों ने भी इस जमीन पर आपत्ति दर्ज करवाई है.
उधर, श्री रेणुका जी बांध परियोजना के कार्यवाहक महाप्रबंधक संजीव कुमार ने बताया कि विस्थापितों को टोकियो में जमीन दिखाई गई है. इस जमीन को चैनेलाइजेशन करके पूरी तरह से डेवल्प किया जाएगा. पार्क आदि बनाए जाएंगे. प्रबंधन ने अंबोया, सैनवाला और चाकली में भी विस्थापितों के लिए जमीनें खरीदी हैं.