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पत्तल से पलटी किस्मत : बिहनधार की महिलाएं बनीं स्वावलंबी, हेती देवी महीने का कमा रही दस हजार

उनका समूह पत्तल बनाने का काम करता है। टौर वृक्ष के हरे पत्तों से बनी यह विशेष थाली, मंडी व आस-पास के क्षेत्रों में काफी प्रचलित है, जिसे आम भाषा में पत्तल कहते हैं। विवाह-शादियों व अन्य समारोहों में यह सामूहिक भोज के लिए विशेष तौर पर प्रयोग में लाई जाती हैं।

मंडी : ग्रामीण परिवेश में रहने वाली महिलाएं सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर सशक्त व स्वावलंबी बन रही हैं। इन्हीं में से एक महिला हैं हेती देवी, जो खाना खाने के लिए विशेष पेड़ की पत्तियों से पत्तलें (थाली) बनाकर सफलता की नई इबारत लिख रही हैं।

मंडी जिला मुख्यालय के समीप बिहनधार गांव की रहने वाली हेती देवी, ज्योति स्वयं सहायता समूह की सचिव हैं। वे बताती हैं कि वर्ष 2018 से वह इस स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। उनका समूह पत्तल बनाने का काम करता है। टौर वृक्ष के हरे पत्तों से बनी यह विशेष थाली, मंडी व आस-पास के क्षेत्रों में काफी प्रचलित है, जिसे आम भाषा में पत्तल कहते हैं। विवाह-शादियों व अन्य समारोहों में यह सामूहिक भोज के लिए विशेष तौर पर प्रयोग में लाई जाती हैं। खाने के लिए स्वच्छ तथा उपयोग के उपरांत आसानी से घुलनशील यह पत्तल पर्यावरण अनुकूल भी हैं।

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हेती देवी बताती हैं कि शुरूआत में वह हाथ से पत्तल बनाती थीं और महीने का लगभग पांच हजार रुपए कमा लेती थीं। वर्ष 2023 के उपरांत उन्होंने मशीन के माध्यम से पत्तलें बनाने का कार्य शुरू किया। विकास खंड मंडी से पत्तल बनाने की मशीन मिलने के बाद उनकी कमाई दोगुना हो गई। अब वह मशीन से पत्तलें बनाकर महीने का लगभग दस हजार रुपए कमा रही हैं। हालांकि यह सब मांग पर भी निर्भर करता है। हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन इसमें सहायक बना है।

उन्होंने बताया कि उनके द्वारा बनाई गई पत्तल गुणवत्ता के हिसाब से दूसरी पत्तलों से बेहतर है। हाथ से बनी पत्तल 200 रुपए सैकड़ा की दर से बिकती हैं, जबकि मशीनी पत्तल की कीमत 400 रूपए प्रति सैकड़ा है। इसके अलावा हाथ से पत्तों के बनाए डूने 100 रुपए सैंकड़ा, जबकि मशीन द्वारा बनाए डूने 200 रुपए प्रति सैकड़ा बिकते हैं। समूह की महिलाएं डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी बिक्री के लिए कर रही हैं। हेती देवी बताती हैं कि उन्हें ऑर्डर मोबाइल के माध्यम से मिल जाता है। इससे उनका कार्य अच्छे से चल रहा है। इस तरह की योजनाओं के लिए वह मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का धन्यवाद करती हैं।

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समूह की प्रधान तृप्ता देवी ने बताया कि उनके समूह का गठन वर्ष 2018 में हुआ था। समूह में छ: महिलाएं हैं। सरकार की ओर से समूह को 40 हजार रुपए रिवॉल्विंग फंड के रूप में मिला है, जिससे समूह में इंटर लोनिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि पत्तलें बनाने के कार्य से वह साल में एक से डेढ़ लाख रुपए कमा रही हैं, जिससे उनके परिवार का खर्च ठीक से चल रहा है। उन्हें सरकार द्वारा पत्तल बनाने की मशीन भी उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिला उत्थान की दिशा में सरकार द्वारा उठाया गया सराहनीय कदम है जिसके लिए वह सरकार का विशेष तौर पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करती हैं।

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उपायुक्त अपूर्व देवगन का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर महिला स्वावलंबन पर बल दिया जा रहा है। सरकार के निर्देशों के अनुसार इन समूहों को सशक्त करने के लिए मंडी जिला में सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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