नाहन : आबकारी विभाग और शराब फैक्ट्रियों के संचालकों के बीच वेतन भुगतान की जिम्मेदारी को लेकर चल रही खींचतान का खामियाजा सिरमौर के 11 होमगार्ड जवान भुगत रहे हैं।
इन जवानों को करीब साढ़े तीन महीने की ड्यूटी के लगभग 12 लाख रुपये वेतन का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। हैरानी की बात है कि जवान पिछले नौ महीनों से अपने बकाया वेतन के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक राहत नहीं मिली। ऐसे में दीपावली का त्योहार भी उनके लिए बिना वेतन के गुजरने की आशंका है।
जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश आबकारी विभाग के जिला सिरमौर कार्यालय ने मार्च में जिला होमगार्ड कमांडेंट को पत्र लिखकर जिले की शराब फैक्ट्रियों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए 11 जवानों की मांग की थी। इसके बाद होमगार्ड जवानों को विभाग के आग्रह पर जिले की विभिन्न शराब फैक्ट्रियों में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात किया गया। इन जवानों ने मार्च से लेकर 2 जुलाई तक अपनी सेवाएं दीं।
अब जब वेतन भुगतान की बात आई तो आबकारी विभाग और शराब फैक्ट्री संचालक एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जवानों का वेतन शराब फैक्ट्रियों के संचालकों को देना है। वहीं, फैक्ट्री संचालकों का तर्क है कि उन्होंने होमगार्ड जवानों की मांग नहीं की थी। आबकारी विभाग ने अपनी ओर से जवानों को फैक्ट्रियों में तैनात किया था, इसलिए वेतन भुगतान की जिम्मेदारी भी विभाग की ही बनती है।
इस विवाद के चलते 11 जवानों का वेतन पिछले नौ माह से नहीं मिल पाया है। जवानों का कहना है कि वे लगातार आबकारी विभाग, होमगार्ड कार्यालय और शराब फैक्ट्री संचालकों से संपर्क कर रहे हैं। कई बार कार्यालयों में जाकर भी वे अपना बकाया वेतन जारी करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
होमगार्ड जवान प्रदीप कुमार, भीम सिंह, रतन सिंह, सुभाष चंद्र, हितेंद्र सिंह, तपेंद्र सिंह, रामकरण, सुनील कुमार, राकेश कुमार, कुलदीप सिंह और प्रेमचंद ने बताया कि उनकी तैनाती के आदेश जिला होमगार्ड कमांडेंट ने आबकारी विभाग के डिप्टी कमिश्नर के आग्रह पर जारी किए थे।
ऐसे में उनके वेतन का भुगतान भी आबकारी विभाग को करना चाहिए। अब विभाग वेतन की जिम्मेदारी शराब फैक्ट्रियों पर डाल रहा है, जबकि फैक्ट्री संचालक भुगतान से इनकार कर रहे हैं। जवानों के अनुसार शराब फैक्ट्रियों की ओर से वेतन भुगतान न करने के मामले में कोर्ट का रुख भी किया गया है।
जवानों ने कहा कि नौ महीने से लंबित वेतन न मिलने के कारण परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है। पहले भी कई त्योहार बिना वेतन के गुजर चुके हैं और अब दीपावली पर भी उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि संबंधित विभाग और फैक्ट्री संचालक आपसी विवाद का समाधान कर जल्द से जल्द उनका बकाया वेतन जारी करें।
उधर, इस मामले में जिला सिरमौर की आबकारी उपायुक्त आर्शी शर्मा ने कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इससे अधिक वह कुछ नहीं कह सकतीं।

