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कैसा मेडिकल कॉलेज, एक्सरे हो रहे न अल्ट्रासाउंड, भटक रहे मरीज, अव्यवस्था का आलम

अस्पताल में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसे आवश्यक टेस्ट न होने से स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर पहुंच गई हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि अस्पताल पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को भी अल्ट्रासाउंड के बिना लौटाया जा रहा है। दूरदराज के दुर्गम ग्रामीण इलाकों से किराया खर्च कर इलाज की उम्मीद में आए मरीजों को इससे भारी निराशा हाथ लग रही है।

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नाहन : सिरमौर जिले का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज नाहन इन दिनों खुद ‘बीमार’ नजर आ रहा है। जिस मेडिकल कॉलेज से जिलावासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की ‘आस’ थी, वही आज अपनी बदहाली और अव्यवस्थाओं के कारण मरीजों के लिए ‘मर्ज’ बन गया है। इसका सबसे बड़ा कारण है डॉक्टरों का अभाव।

अस्पताल में डेंटल एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसे आवश्यक टेस्ट न होने से स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर पहुंच गई हैं। आलम ये है कि अस्पताल पहुंचने वाले सामान्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड के बिना लौटाया जा रहा है। दूरदराज के दुर्गम ग्रामीण इलाकों से किराया खर्च कर इलाज की उम्मीद में आए मरीजों को इससे भारी निराशा हाथ लग रही है। अस्पताल में दांतों के एक्सरे तक नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को बार-बार नई तारीखें देकर टरकाया जा रहा है, जिससे उन्हें इलाज के लिए कई-कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

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मेडिकल कॉलेज में फैली इस अव्यवस्था का सीधा फायदा निजी अस्पतालों और लैब संचालकों को मिल रहा है। आर्थिक रूप से संपन्न लोग तो निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, लेकिन गरीब तबके के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त या सस्ते इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों को अब मजबूरन अपनी जेबें ढीली करनी पड़ रही हैं।

लोगों का आरोप है कि जांच न होने से बीमारी की सही पहचान में देरी हो रही है, जिससे कई मामलों में मरीजों की स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। तीमारदारों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान में यदि बुनियादी जांच सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो आम जनता को राहत कैसे मिलेगी। स्थानीय लोगों में इस स्थिति को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन बड़े-बड़े दावे तो करते हैं, लेकिन हकीकत में सिरमौर की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।

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कालेज प्रबंधन की मानें तो मेडिकल कालेज में सिर्फ उन गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं, जिनके रूटीन चेकअप चले हैं या फिर जिनको डेट दी गई है। इसके साथ साथ इमरजेंसी में ये सुविधा दी जा रही है। जानकारी मिली है कि रेडियोलॉजी विभाग में सीनियर रेजीडेंट के 5 पद खाली चल रहे हैं। वर्तमान में सिर्फ 2 डॉक्टर डेपूटेशन पर सेवाएं दे रहे हैं। इन पर भी काम का इतना बोझ है कि व्यवस्थाएं बनाने में दिक्कतें आ रही हैं।

इसको लेकर मेडिकल कॉलेज नाहन की प्रिंसिपल डॉ. संगीत ढिल्लो ने कहा कि संस्थान में डॉक्टरों की कमी चल रही है। उन्होंने बताया कि स्टाफ कम होने के बावजूद गर्भवती महिलाओं को पूरी सुविधाएं दी जा रही है। इसके साथ साथ बुजुर्ग और बच्चों के अल्ट्रासाउंड भी किए जा रहे हैं।

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