Home Himachal यहां पढ़ाने के साथ झाड़ू थामने को मजबूर हुईं टीचर : 75...

यहां पढ़ाने के साथ झाड़ू थामने को मजबूर हुईं टीचर : 75 बच्चों का भविष्य संवारने के साथ शौचालयों की सफाई… खोल रही व्यवस्थाओं की पोल

विडंबना ये है कि जिन हाथों में चॉक और कलम होनी चाहिए, उन्हीं हाथों को स्कूल के टॉयलेट साफ करने और परिसर में झाड़ू लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सेंटर हैड टीचर न केवल अपने स्कूल के विद्यार्थियों को पढ़ा रही हैं, बल्कि स्कूल का प्रशासनिक कार्य, शैक्षणिक रिकॉर्ड बनाए रखना और मिड-डे मील जैसी व्यवस्थाओं की देखरेख भी अकेले कर रही हैं।

0

नाहन : भले ही प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं, मगर जमीनी स्तर पर इन दावों की पोल ग्रामीण क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल की तस्वीरें खोल रही हैं। यहां बात हो रही है हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के दुर्गम क्षेत्र के राजकीय प्राइमरी स्कूल भुवाई की। श्री रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र का ये स्कूल सरकारी व्यवस्थाओं पर सीधा सवालिया निशान लगाता नजर आ रहा है। इस स्कूल से सामने आई तस्वीरों से साफ है कि दूरदराज के स्कूलों में व्यवस्थाओं में सुधार लाने के दावे सच्चाई से कोसों दूर हैं।

अव्यवस्थाओं का आलम ये है कि इस स्कूल में (प्री-प्राइमरी से लेकर पांचवीं कक्षा) 70 से ज्यादा नौनिहालों का भविष्य तराशने की जिम्मेदारी महज 2 शिक्षकों पर हैं। इनमें एक सीएचटी (CHT) हैं, जिनके पास इस स्कूल के साथ कलस्टर के 5 अन्य स्कूलों के प्रबंधन का भी जिम्मा है। इन सभी व्यवस्थाओं को संभालने के साथ साथ सीएचटी अपने ही स्कूल की सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भी मजबूर हैं। इस स्कूल में कोई भी सफाई कर्मी तैनात नहीं है। लिहाजा, स्कूल भवन सहित शौचालयों की साफ-सफाई भी महिला शिक्षिका (सीएचटी) एक सफाई कर्मी के तौर पर निभा रही हैं।

ये भी पढ़ें:  बबली के बाद अब ये नशा तस्कर भी भेजा सेंट्रल जेल, बार-बार नशे के कारोबार में मिला था संलिप्त

विडंबना ये है कि जिन हाथों में चॉक और कलम होनी चाहिए, उन्हीं हाथों को स्कूल के टॉयलेट साफ करने और परिसर में झाड़ू लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सेंटर हैड टीचर न केवल अपने स्कूल के विद्यार्थियों को पढ़ा रही हैं, बल्कि स्कूल का प्रशासनिक कार्य, शैक्षणिक रिकॉर्ड बनाए रखना और मिड-डे मील जैसी व्यवस्थाओं की देखरेख भी अकेले कर रही हैं। एसएमसी प्रधान वीरेंद्र ने बताया कि यह शिक्षिका न केवल इस स्कूल को चला रही हैं, बल्कि इनके पास पांच अन्य प्राथमिक स्कूलों की निगरानी का कार्यभार भी है।

उन्होंने बताया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मी और स्टाफ की कमी के चलते ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन समिति में भारी रोष है। पांच साल पहले यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मी भी तैनात था, लेकिन इसके बाद ये पद खाली है। स्कूल में सीएचटी के अलावा वर्तमान में एक अन्य अध्यापक कार्यरत तो हैं, लेकिन वे अप्रैल माह में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ रही है, क्योंकि तब पूरा स्कूल और बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह केवल एक ही शिक्षिका के भरोसे रह जाएगी। स्थानीय लोगों के लिए ये हैरानी का विषय है कि एक ही कर्मचारी शिक्षा, प्रशासन और सफाई व्यवस्था को संभाल रही है। स्कूल प्रबंधन समिति और अभिभावकों ने सरकार से मांग की कि यहां तुरंत अतिरिक्त शिक्षकों और सफाई कर्मचारी की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और स्कूल के अन्य कार्य सुचारू ढंग से चलते रहें।

ये भी पढ़ें:  किसान सभा ने नदी में चल रही खुदाई का किया विरोध, क्रशर के खिलाफ मांगी कार्रवाई

उधर, उपनिदेशक एलीमेंट्री शिक्षा सिरमौर राजीव ठाकुर ने बताया कि उन्हें अब तक स्कूल या एसएमसी की ओर से इस बारे किसी भी तरह की सूचना नहीं मिली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही नियुक्तियां होंगी, व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा।