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CM सुक्खू बोले- दूध उत्पादकों को हर महीने दिए जा रहे 34.18 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ

वर्ष 2026-27 के बजट में गाय के दूध का खरीद मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का खरीद मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पिछले तीन वर्षों में ग्राम दुग्ध समितियों की सदस्य संख्या 27,498 से बढ़कर 39,790 हो गई है।

शिमला : प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, जिसमें किसानों और दूध उत्पादकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य डेयरी व्यवसाय को ग्रामीण परिवारों के लिए एक विश्वसनीय और लाभदायक आय का स्त्रोत बनाना है।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि किसानों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना प्रदेश सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसानों एवं बागवानों को हर संभव सहयोग देने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। गांवों, किसानों, महिलाओं एवं ग्रामीण युवाओं को केंद्र में रखकर राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना प्रदेश सरकार का मुख्य लक्ष्य है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रदेश सरकार राज्य के दुग्ध उत्पादकों को वित्तीय रूप से सशक्त कर रही है। इस क्रम में प्रदेश के दूध उत्पादकों को औसतन 34.18 करोड़ रुपये प्रतिमाह के वित्तीय लाभ प्रदान किए जा रहे हैं, जो अब तक का सर्वाधिक लाभ है। वर्ष 2024-25 में 1.57 लाख लीटर प्रतिदिन के औसत की तुलना में वर्तमान में हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (मिल्कफेड) द्वारा प्रतिदिन लगभग 2.70 लाख लीटर दूध की खरीद की जा रही है। सरकार के प्रयासों से यह उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

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मिल्कफेड द्वारा घर-घर जाकर दूध संग्रहण सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले दुग्ध उत्पादकों को विशेष लाभ मिल रहा है। सरकार की इस पहल से किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है, जिससे वह सामाजिक और आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो रहे हैं। राज्य सरकार ने दूध खरीद मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि करने के साथ-साथ किसानों के सशक्तिकरण के लिए अनेक कदम उठाए हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में गाय के दूध का खरीद मूल्य 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का खरीद मूल्य 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पिछले तीन वर्षों में ग्राम दुग्ध समितियों की सदस्य संख्या 27,498 से बढ़कर 39,790 हो गई है।

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इसके अतिरिक्त ग्राम दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या 583 से बढ़कर 758 हो गई है। रोजगार सृजन और दूध संग्रहण गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए दुग्ध उत्पादक समूहों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों का भी गठन किया जा रहा है। डेयरी अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार द्वारा कई ठोस कदम उठाए गए हैं। वर्तमान में संघ द्वारा 1.80 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के 11 दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र संचालित किए जा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त कांगड़ा जिले के ढगवार में 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का अत्याधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इसकी क्षमता को 3 लाख लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकता है। डेयरी क्षेत्र में सहकार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया है। इस साझेदारी के अंतर्गत कांगड़ा जिले में एक नया मिल्क यूनियन स्थापित किया जाएगा। इससे कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चंबा जिलों के दुग्ध उत्पादक लाभान्वित होंगे। सरकार के इस कदम से दूध संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी।

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डेयरी क्षेत्र की नई तकनीकों और नवाचारों से किसानों को अवगत करवाने के लिए पिछले तीन वर्षों में 2,000 से अधिक किसानों को विभिन्न संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 222 स्वचालित दूध संग्रहण इकाइयां तथा 32 डेटा प्रोसेसिंग दूध संग्रहण इकाइयां स्थापित की गई हैं।

Aapki Baat News Desk
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