शिमला : हिमाचल प्रदेश में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बिजली की नई दरों को लेकर करसत शुरू हो गई है। राज्य विद्युत बोर्ड ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रति यूनिट 10 से 25 पैसे तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। आयोग की मंजूरी मिलने के बाद 1 अप्रैल 2026 से उपभोक्ताओं को अधिक बिजली बिल चुकाना पड़ सकता है। राज्य विद्युत बोर्ड का कहना है कि प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए उसे महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। खरीद लागत और राजस्व के बीच बढ़ते अंतर को देखते हुए बोर्ड ने यह बढ़ोतरी प्रस्तावित की है, ताकि वित्तीय संतुलन बनाया जा सके।

दर वृद्धि के प्रस्ताव को लेकर आयोग के समक्ष विभिन्न पक्षों ने अपनी बात रखी है। राज्य विद्युत बोर्ड, पावर कॉरपोरेशन और ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के अलावा शिमला होटल एसोसिएशन और अन्य व्यापारिक संगठनों ने भी सुनवाई में हिस्सा लिया। आयोग ने वैधानिक प्रक्रिया के तहत शिमला, धर्मशाला और बद्दी में जनसुनवाई पूरी कर ली है। इस प्रस्ताव के पीछे सरकार की बदली हुई नीति को भी अहम कारण माना जा रहा है। पहले राज्य को सतलुज जल विद्युत निगम से 26 प्रतिशत निःशुल्क बिजली मिलती थी, जिसे विद्युत बोर्ड को दिया जाता था।
अब सरकार ने इस हिस्सेदारी की बिजली को खुले बाजार में बेचने का फैसला किया है। इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व तो मिलेगा, लेकिन बोर्ड को बाजार से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है, जिसका वित्तीय असर अब उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। विद्युत नियामक आयोग बोर्ड की याचिका पर मार्च के अंत तक अंतिम निर्णय दे सकता है। मंजूरी मिलने की स्थिति में नई दरें 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगी।



