नई दिल्ली : देश के सबसे बड़े प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभियान जनगणना-2027 का आगाज हो गया है। भारत सरकार ने इसके पहले चरण ‘मकानसूचीकरण और मकानों की गणना (HLO)’ की शुरुआत कर दी है, जो इस बार पूरी तरह डिजिटल डेटा कैप्चर और स्व-गणना (Self Enumeration) सुविधा के साथ हो रही है।
देश की परंपरा को निभाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्व-गणना विकल्प के माध्यम से इस राष्ट्रीय प्रक्रिया की शुरुआत की। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में ऑनलाइन फॉर्म भरकर भागीदारी निभाई, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी स्व-गणना पूरी कर देशवासियों से अपील की कि वे स्वयं अपने परिवार का विवरण दर्ज कर इस अभियान में हिस्सा लें। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना कर जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।
पहले चरण में आज से 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्व-गणना शुरू की गई है। इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और दिल्ली के NDMC व दिल्ली छावनी क्षेत्र शामिल हैं। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक पहले ही दिन करीब 55 हजार परिवार इस सुविधा का उपयोग कर चुके हैं।
सरकार की ओर से दी गई यह स्व-गणना सुविधा पूरी तरह सुरक्षित और वेब आधारित है, जो 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। पहली बार लोगों को यह विकल्प दिया गया है कि वे प्रगणक के घर आने से पहले ही ऑनलाइन अपना विवरण भर सकें। इसके लिए व्यक्ति se.census.gov.in पोर्टल पर मोबाइल नंबर और जरूरी क्रेडेंशियल्स के जरिए लॉग इन कर सकते हैं। फॉर्म जमा होने के बाद एक यूनिक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी (SE ID) जनरेट होती है, जिसे बाद में प्रगणक के साथ सत्यापन के लिए साझा किया जाएगा।
इस चरण में मकानों की स्थिति, घरेलू सुविधाएं और उपलब्ध परिसंपत्तियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इसके लिए कुल 33 प्रश्न अधिसूचित किए गए हैं, जो भविष्य की नीतियों, योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
मकानसूचीकरण और मकानों की गणना का यह चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक पूरे देश में चलेगा। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को इसके लिए 30 दिन की अवधि तय की जाएगी, जबकि घर-घर सर्वे से पहले 15 दिन का अतिरिक्त समय स्व-गणना के लिए दिया गया है।
जनगणना को शासन और विकास की आधारशिला माना जाता है, जो अगले दशक की योजना निर्माण में अहम भूमिका निभाती है। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एकत्रित सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रखे जाते हैं। इस बार इस्तेमाल हो रहे डिजिटल प्लेटफॉर्म में उच्च स्तर की डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत एन्क्रिप्शन और मल्टी-लेयर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल किया गया है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे स्व-गणना या प्रगणकों को सहयोग देकर इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
