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गुलाल से चमका शोध: डॉ. अंशुल कुमार का काम बना ‘राष्ट्रीय मॉडल’, मिला बेस्ट डॉक्टोरल अवॉर्ड

इस महत्वपूर्ण अनुसंधान के परिणामस्वरूप एक व्यावसायिक रूप से उपयोगी तकनीक विकसित की गई है, जिसके जरिए हर्बल गुलाल का उत्पादन और बिक्री भी की जा रही है। इस उपलब्धि से न केवल संस्थान, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है।

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सोलन : पुष्पकला और लैंडस्केपिंग विभाग के वैज्ञानिक डॉ. अंशुल कुमार को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए बेस्ट डॉक्टोरल डिसर्टेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें वर्ष 2025 में पूर्ण किए गए अपने पीएच.डी. शोध “स्टडीज ऑन स्टोरेबिलिटी, फिजिको-केमिकल एंड सेंसरी कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ गुलाल डिराइव्ड फ्रॉम फ्रेश एंड ड्राइड मैरीगोल्ड फ्लावर्स” के लिए प्रदान किया गया।

यह शोध कार्य डॉ. भारती कश्यप (एसोसिएट प्रोफेसर, एफएलएस) के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑर्नामेंटल हॉर्टिकल्चर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “Floriculture and Landscaping @ 2047 Viksit Bharat” के दौरान प्रदान किया गया।

सम्मेलन का आयोजन केलाडी शिवप्पा नायक यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल एंड हॉर्टिकल्चरल साइंसेज में किया गया, जहां देशभर से वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। यह शोध कार्य CSIR-इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी के सहयोग से पूरा हुआ।

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इस महत्वपूर्ण अनुसंधान के परिणामस्वरूप एक व्यावसायिक रूप से उपयोगी तकनीक विकसित की गई है, जिसके जरिए हर्बल गुलाल का उत्पादन और बिक्री भी की जा रही है। इस उपलब्धि से न केवल संस्थान, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है।