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दशकों का इंतजार खत्म! अप्रैल से जमीन पर उतरेगा रेणुकाजी बांध, पहले चरण में शुरू होगा 910 करोड़ का ये बड़ा काम

लंबे समय से कागजी प्रक्रियाओं, तकनीकी मंजूरियों और प्रशासनिक औपचारिकताओं में उलझी यह महत्वाकांक्षी परियोजना अप्रैल माह से वास्तविक निर्माण चरण में प्रवेश करेगी।

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नाहन : सिरमौर जिला की सबसे बड़ी और वर्षों से प्रतीक्षा में रही रेणुकाजी बहुउद्देशीय बांध परियोजना आखिरकार जमीन पर उतरने जा रही है। लंबे समय से कागजी प्रक्रियाओं, तकनीकी मंजूरियों और प्रशासनिक औपचारिकताओं में उलझी यह महत्वाकांक्षी परियोजना अप्रैल माह से वास्तविक निर्माण चरण में प्रवेश करेगी। सबसे अहम बात यह है कि पहले चरण के लिए 910.08 करोड़ रुपये का कार्य अवार्ड हो चुका है और अब घाटी में मशीनों की आवाज सुनाई देने का समय आ गया है।

सूत्रों के अनुसार हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) ने परियोजना के प्रथम चरण के तहत डायवर्सन टनल यानी व्यपवर्तन सुरंग निर्माण का कार्य पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड को सौंपा है। इस चरण में करीब 9.5 मीटर व्यास वाली और लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। इन सुरंगों के जरिए गिरि नदी के जल प्रवाह को मोड़कर मुख्य बांध निर्माण के लिए आधार तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही पहुंच मार्ग, मशीनरी संचालन और अन्य तकनीकी आधारभूत संरचनाओं का काम भी गति पकड़ेगा।

रेणुकाजी बांध परियोजना को सिरमौर ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल की सबसे महत्वपूर्ण विकास योजनाओं में गिना जाता रहा है। गिरि नदी पर प्रस्तावित यह परियोजना जल प्रबंधन, बिजली उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और क्षेत्रीय विकास के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। वर्षों तक अंतरराज्यीय समन्वय, तकनीकी मंजूरियों और प्रशासनिक पेचीदगियों में फंसी रहने के बाद अब सरकार, संबंधित एजेंसियों और एचपीपीसीएल के प्रयासों से यह परियोजना निर्माण के वास्तविक चरण तक पहुंची है।

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परियोजना का पहला चरण केवल सुरंग निर्माण नहीं, बल्कि पूरे बांध निर्माण की बुनियादी शुरुआत माना जा रहा है। डायवर्सन टनल बनने के बाद मुख्य बांध स्थल पर बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियां शुरू हो सकेंगी। इसके साथ ही मुख्य बांध निर्माण से जुड़ी अन्य तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियां भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार चलता है, तो इसी वर्ष के अंत तक मुख्य बांध निर्माण कार्य भी शुरू होने की उम्मीद है।

तकनीकी और आर्थिक दृष्टि से यह परियोजना हिमाचल के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रस्तावित 148 मीटर ऊंचा रॉक-फिल बांध न केवल 40 मेगावाट बिजली उत्पादन करेगा, बल्कि दिल्ली को पेयजल आपूर्ति में भी इसकी बड़ी भूमिका होगी। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश को जल संसाधन, राजस्व, आधारभूत विकास और स्थानीय रोजगार के स्तर पर भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। यही वजह है कि इसे सिरमौर की भाग्यरेखा और प्रदेश की गेम चेंजर परियोजनाओं में गिना जा रहा है।

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उधर, जहां एक ओर क्षेत्र में परियोजना को लेकर उत्साह बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्तरों पर विरोध और भ्रम फैलाने की कोशिशें भी सामने आ रही हैं। संकेत ये भी मिल रहे हैं कि यदि निर्माण, सर्वेक्षण या तकनीकी कार्यों में जानबूझकर रुकावट डालने की कोशिश की गई, तो प्रशासन ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त रुख अपना सकता है।

परियोजना के साथ-साथ विस्थापन और पुनर्वास का मुद्दा भी बराबर अहम बना हुआ है। प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया विभागीय स्तर पर पहले से चल रही है। सरकार और संबंधित विभागों की कोशिश है कि विकास कार्य और प्रभावितों के हित दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए, ताकि परियोजना को लेकर किसी तरह का असंतुलन न बने।

सूत्रों के अनुसार परियोजना के पहले चरण को करीब 30 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि यह कार्य तय समयसीमा में पूरा होता है, तो आने वाले वर्षों में रेणुकाजी बांध परियोजना सिरमौर जिला की अर्थव्यवस्था, रोजगार, आधारभूत ढांचे और समग्र विकास की दिशा बदलने वाला बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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उधर, निदेशक सिविल एस. के. चौधरी ने बताया कि अप्रैल माह से डायवर्सन टनल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि टनल निर्माण के साथ-साथ मुख्य बांध निर्माण से जुड़ी तमाम औपचारिकताएं पूरी कर सेंट्रल वॉटर कमिशन को भेज दी गई हैं, ताकि इसी वर्ष के अंत तक मुख्य बांध निर्माण कार्य भी सुविधाजनक तौर पर शुरू किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि माननीय न्यायालय के आदेशों के अनुरूप बांध विस्थापन से प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है। साथ ही उन्होंने बताया कि आर एंड आर नियमों के तहत जो भी उचित मुआवजा, सुविधा अथवा पुनर्वास योजना बनती है, उसे भी पूरी तरह लागू किया जाएगा।