इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बहुप्रतीक्षित उच्च स्तरीय वार्ता आखिरकार बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। करीब 21 घंटे तक चली इस लंबी और मैराथन चर्चा के बावजूद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सके। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने खुद वार्ता विफल होने की पुष्टि करते हुए इसे ईरान के लिए नुकसान करार दिया।
वार्ता के दौरान सबसे बड़ा गतिरोध ईरान के परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नियंत्रण के मुद्दे को लेकर सामने आया। अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर दीर्घकालिक और स्पष्ट प्रतिबद्धता दे, लेकिन ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता का मामला बताते हुए मानने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियों की बहाली और लेबनान में संघर्ष विराम जैसे मुद्दों पर भी सहमति नहीं बन सकी।
वार्ता के बाद मीडिया से बातचीत में जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने अपना “सबसे बेहतर और अंतिम प्रस्ताव” ईरान के सामने रखा था, लेकिन ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने लचीला रुख अपनाते हुए पूरी ईमानदारी से प्रयास किए, लेकिन अब आगे का फैसला ईरान को करना है। बैठक के तुरंत बाद वेंस इस्लामाबाद से अमेरिका रवाना हो गए।
वहीं दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय और सरकारी मीडिया ने इस विफलता के लिए अमेरिका की “अत्यधिक मांगों” को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि कुछ अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरी खाई बनी हुई है और जब तक उनकी आर्थिक और सुरक्षा चिंताओं का समाधान नहीं होता, तब तक किसी समझौते की उम्मीद कम है।
गौरतलब है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह पहली बार था जब अमेरिका और ईरान के इतने उच्च स्तरीय प्रतिनिधि आमने-सामने बातचीत के लिए बैठे। पाकिस्तान की मेजबानी में इस्लामाबाद में हुई इस वार्ता के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद मध्यस्थता की कोशिश की। फिलहाल इस असफल वार्ता के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
