नाहन : हिमाचल प्रदेश में सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध किए जाने के निर्णय का अभिभावकों ने स्वागत किया है। इस पहल के बाद बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला निजी विद्यालयों से निकालकर सरकारी सीबीएसई स्कूलों में करवाया है। विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को सरकारी स्कूलों में बढ़ते विश्वास के रूप में देखा जा रहा है।
अभिभावक आशीष कुमार ने जारी प्रेस बयान में कहा कि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी और मेरिट आधारित चयन के बजाय अन्य विद्यालयों से स्थानांतरण के माध्यम से पद भरने की चर्चाओं ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि सीबीएसई सब-कैडर भर्ती के लिए हजारों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, स्क्रीनिंग टेस्ट दिया और पारदर्शी चयन प्रक्रिया पर भरोसा जताया। ऐसे में यदि अब इस प्रक्रिया को दरकिनार कर नियुक्तियां की जाती हैं तो यह योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा और भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करेगा।
आशीष कुमार ने कहा कि सीबीएसई स्कूलों की स्थापना का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और विषय विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध करवाना है। यदि नियुक्तियों में मेरिट और पारदर्शिता की अनदेखी की गई तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ेगा और सरकारी स्कूलों के प्रति बढ़ रहा विश्वास कमजोर होगा।
उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि क्या सरकार अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए भर्ती नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। उनका कहना है कि यदि ऐसा किया जाता है तो यह उन हजारों अभ्यर्थियों और अभिभावकों के साथ विश्वासघात होगा, जिन्होंने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा किया है। उन्होंने इसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के सपने के साथ खिलवाड़ करार दिया।
आशीष कुमार ने मांग की कि सरकार पूर्व निर्धारित भर्ती नियमों, स्क्रीनिंग टेस्ट, मेरिट और चयन प्रक्रिया के आधार पर ही नियुक्तियां करे और भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कर विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करे, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का रास्ता पारदर्शी भर्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की नियुक्ति से होकर जाता है। शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
