नाहन : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से बचने का आरोप लगाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2025 में ही हो जाने चाहिए थे, लेकिन कांग्रेस सरकार ने संविधान और जनभावनाओं की अनदेखी करते हुए चुनावों को जानबूझकर टालने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पहले से ही अंदेशा था कि जनता उनकी सरकार को नकारने वाली है, इसलिए कांग्रेस चुनावों से भागती रही।
बुधवार को नाहन में पत्रकारों से बातचीत में डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई और चुनाव परिणामों ने कांग्रेस की वास्तविक स्थिति प्रदेश के सामने ला दी। उन्होंने दावा किया कि जनता का कांग्रेस सरकार से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने पहले 80 प्रतिशत सीटें जीतने का दावा किया था, लेकिन वास्तविक परिणाम इसके विपरीत सामने आए हैं। उनके अनुसार, जिला परिषद चुनावों में प्रदेश के 12 में से 11 जिलों में भाजपा स्पष्ट बहुमत और मजबूत स्थिति में है। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनावों को टालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने नगर परिषद के गठन में देरी को भी सरकार की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता का उदाहरण बताया।
डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता ने भ्रष्टाचार, तानाशाही, टैक्सों के बोझ, कानून व्यवस्था की विफलता और विकास कार्यों में ठहराव के खिलाफ मतदान किया है। नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव से जो मेंडेट आया है, उससे साफ है कि कांग्रेस सरकार सत्ता से आउट होने वाली है और प्रचंड बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने वाली है।
सिरमौर जिले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले में भी जनता ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है। उन्होंने दावा किया कि जिला परिषद की 17 में से 14 सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत इस बात का प्रमाण है कि जनता कांग्रेस सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सिरमौर जिला स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का बड़ा उदाहरण बन गया है। अस्पतालों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और दवाइयों की भारी कमी है। मेडिकल कालेज नाहन में ऑपरेशन थिएटर बंद पड़े हैं। वेंटिलेटर इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं और लोगों को हिमकेयर जैसी सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है।
इस वजह से मरीजों को इलाज के लिए उत्तराखंड, हरियाणा और चंडीगढ़ का रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 2000 से अधिक संस्थानों पर ताले लगाए और नए-नए कर लगाकर जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला है।
बिंदल ने कहा कि प्रदेश में जो भी विकास कार्य हो रहे हैं, वे केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वीकृत परियोजनाओं के माध्यम से हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सीआरएफ और अन्य केंद्रीय योजनाओं के जरिए विकास कार्य आगे बढ़ रहे हैं, जबकि प्रदेश सरकार की ओर से कोई ठोस योगदान दिखाई नहीं देता।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के भीतर भारी अस्थिरता और अंतर्विरोध हैं। मंत्री, विधायक और अधिकारी सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के खिलाफ बयान दे रहे हैं और सरकार के भीतर समन्वय पूरी तरह समाप्त हो चुका है, जिसका असर प्रदेश की जनता पर पड़ रहा है।
अंत में उन्होंने प्रदेश की जनता, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता ने भाजपा के प्रति अपना विश्वास प्रकट किया है। उन्होंने दावा किया कि यह जनादेश आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए प्रचंड बहुमत का संकेत है।