शिमला : साफ हवा, शुद्ध पानी और बेहतर पर्यावरण के लिए पहचाने जाने वाले हिमाचल प्रदेश के सामने अब कैंसर बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। राष्ट्रीय स्तर के स्वास्थ्य अध्ययन LASI में प्रदेश को कैंसर मरीजों के अनुपात में देश में सबसे ऊपर बताया गया है। लिहाजा, प्रदेश में कैंसर तेजी से गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य अध्ययनों में शामिल लोंगीट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया (LASI) के नवीन विश्लेषण ने प्रदेश के लिए गंभीर चेतावनी दी है। अध्ययन के अनुसार प्रदेश में स्वयं बताए गए कैंसर मरीजों का अनुपात 2.2 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि राष्ट्रीय औसत 0.6 प्रतिशत है। यानी देश के औसत की तुलना में हिमाचल में कैंसर के मामले लगभग चार गुना अधिक हैं।
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब राज्य सरकार भी बढ़ते कैंसर मामलों पर चिंता जता चुकी है। विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बताया था कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में 6,627 कैंसर मरीज दर्ज किए गए, जिनमें मंडी और शिमला सबसे अधिक प्रभावित जिले रहे। वर्ष 2016 में शुरू हुई LASI स्टडी 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों पर आधारित देश का सबसे बड़ा दीर्घकालिक स्वास्थ्य अध्ययन है। इसके पहले चरण में वर्ष 2017-18 के दौरान देशभर के 72 हजार से अधिक लोगों को शामिल किया गया था। नवीन विश्लेषण के अनुसार हिमाचल में 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों में कैंसर के मामले सबसे ज्यादा पाए गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कैंसर की समय पर पहचान हो जाए तो कई प्रकार के कैंसर का सफल उपचार संभव है। इसके लिए 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की नियमित जांच, 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की विशेष स्क्रीनिंग, तंबाकू और शराब से दूरी, संतुलित जीवनशैली तथा जिला स्तर तक आधुनिक जांच सुविधाओं का विस्तार बेहद जरूरी है। LASI अध्ययन और विधानसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़े संकेत देते हैं कि यदि रोकथाम, समय पर जांच और उपचार व्यवस्था को और मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में हिमाचल में कैंसर का संकट और गहरा सकता है।
प्रदेश में बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार उपचार सुविधाओं का विस्तार कर रही है। हमीरपुर में अत्याधुनिक कैंसर संस्थान विकसित किया जा रहा है। आईजीएमसी शिमला, डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा सहित अन्य मेडिकल कॉलेजों में चरणबद्ध तरीके से पीईटी-सीटी स्कैन जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जांच सुविधाएं बढ़ने से पहले की तुलना में अधिक मरीजों की पहचान हो रही है। आईजीएमसी शिमला के वर्ष 2018 से 2022 के अध्ययन में भी लगभग सभी जिलों में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने की बात सामने आई है। उनका मानना है कि दूरदराज क्षेत्रों में समय पर जांच नहीं होने के कारण वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। पीजीआई चंडीगढ़ में भी हिमाचल के कई मरीज अपना उपचार करवा रहे हैं। चंडीगढ़ में ऐसे मरीजों का उपचार कर रहे चिकित्सक भी हिमाचल में कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर हैरत में हैं। बहरहाल, प्रदेश में बढ़ता कैंसर का डंक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
