~चंद्रकांत पाराशर
एनसीआर दिल्ली : उत्तरप्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन स्थित गंगा बाग कोठी, दस बीसा में अवस्थित सिद्ध सिद्धांत योग अकादमी परिसर में 10 जुलाई को क्रिया-योग परंपरा के प्रमुख आचार्य योगीराज शैलेन्द्र शर्मा का 69वां जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर उनकी जीवनी ‘शैलेन्द्र: एक श्मशानवासी की जीवन कथा’ का भव्य विमोचन भी किया गया। पुस्तक की लेखिका शुभ्रा पाठक शर्मा हैं, जिन्होंने योगीराज के जीवन, साधना और आध्यात्मिक अनुभवों को पुस्तक का रूप दिया है।
समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में साधक, श्रद्धालु और अनुयायी शामिल हुए। आयोजन का संचालन गायक, लेखक एवं अभिनेता गीत सागर ने किया। इस दौरान योगीराज शैलेन्द्र शर्मा के वरिष्ठ शिष्य विजयानंद नरवरिया और लेखिका शुभ्रा पाठक शर्मा ने पुस्तक की रचना, उसके उद्देश्य और योगीराज के व्यक्तित्व पर अपने विचार रखे।
अपने संबोधन में योगीराज शैलेन्द्र शर्मा ने कहा कि शुभ्रा पाठक बचपन से उनके साथ रही हैं और उन्होंने उनके जीवन में घटित अनेक घटनाओं को निकट से देखा-समझा है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में वर्णित घटनाएं, अनुभव और उनका योगिक विश्लेषण सत्य की खोज करने वाले साधकों के लिए प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।
आयोजकों के अनुसार पुस्तक केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि क्रिया-योग की साधना, आध्यात्मिक अनुभवों और गुरु-शिष्य परंपरा को समझने का भी माध्यम है। उनका कहना है कि पुस्तक के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों और देश-विदेश के साधकों को योगीराज शैलेन्द्र शर्मा के जीवन और साधना के विभिन्न आयामों को जानने का अवसर मिलेगा।
समारोह पंचतीर्थ कुंड परिसर में आयोजित किया गया, जिसे आयोजकों ने धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम के दौरान संगीत, प्रकाश सज्जा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया गया। जन्मोत्सव के अवसर पर पूरे परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना तथा आध्यात्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता की।
आयोजकों का कहना है कि योगीराज शैलेन्द्र शर्मा क्रिया-योग परंपरा के प्रमुख आचार्यों में गिने जाते हैं और उनकी शिक्षाओं का अनुसरण देश-विदेश में बड़ी संख्या में साधक करते हैं। उनके अनुसार योगीराज ने आधुनिक समय में क्रिया-योग की परंपरा को व्यापक स्तर पर स्थापित करने का कार्य किया है।
पुस्तक ‘शैलेन्द्र: एक श्मशानवासी की जीवन कथा’ ऑनलाइन भी उपलब्ध कराई गई है। इच्छुक पाठक इसे प्रकाशक की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं।
