चंबा : मेडिकल कॉलेज चंबा में इलाज के अभाव में एक मासूम बच्ची की मृत्यु पर भरमौर-पांगी के विधायक डॉ. जनक राज ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपने बच्चे को खोने से बड़ा दुख कोई नहीं हो सकता। यदि समय पर उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण बच्ची की जान गई है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
डॉ. जनक राज ने कहा कि एक पिता और चिकित्सक होने के नाते वे उस परिवार की पीड़ा को समझ सकते हैं, जिसने अपने मासूम बच्चे को खोया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को समय पर आवश्यक उपचार और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सरकार और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी अव्यवस्थाओं और लापरवाही के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार इन घटनाओं से सबक लेकर व्यवस्था में आवश्यक सुधार करने के बजाय उन्हें नजरअंदाज करती दिखाई दे रही है। डॉ. जनक राज ने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भी उन्होंने प्रदेश की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार से सवाल पूछे थे, लेकिन सरकार ने गंभीर विषयों पर भी गोलमोल जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया।
डॉ. जनक राज ने कहा कि इलाज के अभाव अथवा कथित लापरवाही से होने वाली प्रत्येक मौत की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर व्यवस्थाओं में सुधार करना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ा से न गुजरना पड़े।
उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि बड़े-बड़े दावों और भाषणों से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरेगी। इसके लिए अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और विशेषज्ञ उपलब्ध कराने के साथ-साथ जरूरी दवाइयां, आधुनिक चिकित्सा उपकरण तथा प्रभावी आपातकालीन सेवाएं सुनिश्चित करनी होंगी।
डॉ. जनक राज ने कहा कि सरकार को अपनी प्रशासनिक कमियों को ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का नाम देने के बजाय स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को स्वीकार कर उनका समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवा में किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं हो सकती। प्रत्येक नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलना सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए।
