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महिलाओं की श्रम भागीदारी में हिमाचल का हमीरपुर देश में नंबर-1, दिल्ली का यह जिला सबसे नीचे

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी संशोधित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के आंकड़ों ने देश के पहले जिला जिलास्तरीय श्रम बाजार की एक विस्तृत और स्पष्ट तस्वीर पेश की है।

PLFS Report 2026 : राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी संशोधित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के आंकड़ों ने देश के पहले जिला जिलास्तरीय श्रम बाजार की एक विस्तृत और स्पष्ट तस्वीर पेश की है। यह पहला मौका है जब देश में जिला स्तर पर श्रम बल भागीदारी दर (LFPR), श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR), बेरोजगारी दर और शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर युवाओं (NEET) के अनुमान जारी किए गए हैं।

इन आंकड़ों से साफ है कि अलग-अलग राज्यों और जिलों के बीच रोजगार के अवसरों और कार्यबल भागीदारी में भारी अंतर मौजूद है। आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) के मामले में हिमाचल प्रदेश का हमीरपुर जिला पूरे देश में शीर्ष स्थान पर रहा है। हमीरपुर में महिलाओं की कार्यबल भागीदारी दर रिकॉर्ड 80.9 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद जम्मू-कश्मीर के बडगाम में 71.4 प्रतिशत, ओडिशा के मयूरभंज में 71.8 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ के सरगुजा में 69 प्रतिशत महिला LFPR दर्ज की गई है।

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आंकड़ों के अनुसार देश के लगभग 57.8 प्रतिशत जिलों में महिला LFPR 40 प्रतिशत या उससे अधिक रही है। इसके विपरीत कई प्रमुख शहरी और ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की भागीदारी बेहद निराशाजनक रही है। देश की राजधानी का पूर्वी दिल्ली जिला इस मामले में सबसे निचले पायदान पर रहा, जहां महिला श्रम बल भागीदारी दर घटकर महज 18.9 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, बिहार के सीवान में यह आंकड़ा 24.7 प्रतिशत और पंजाब के पटियाला में 39.3 प्रतिशत ही रिकॉर्ड किया गया, जो महिलाओं के रोजगार में मौजूद क्षेत्रीय विषमता को उजागर करता है।

समग्र श्रम बल भागीदारी और श्रमिक जनसंख्या अनुपात के मामले में गुजरात के सूरत जिले ने 68.6 प्रतिशत LFPR और 67.8 प्रतिशत WPR के साथ देश भर में पहला स्थान हासिल किया। इस सूची में सूरत के बाद बिहार का अररिया और तमिलनाडु का सलेम जिला शीर्ष प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहे। दूसरी ओर, बिहार के दरभंगा जिले में दोनों ही पैमानों (LFPR और WPR) पर सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया, जो वहां रोजगार के अवसरों की कमी को दर्शाता है।

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सर्वेक्षण के अनुसार, देश के लगभग 98 प्रतिशत जिलों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए श्रम बल भागीदारी दर और श्रमिक जनसंख्या अनुपात 40 से 80 प्रतिशत के बीच रहा। देश के 100 सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में श्रमिक जनसंख्या अनुपात 37.3 प्रतिशत से 76.7 प्रतिशत के बीच दर्ज किया गया। अधिकांश हिस्सों में कुल बेरोजगारी दर 0.5 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत के दायरे में पाई गई। इसके अलावा, तीन-चौथाई से अधिक जिलों में 15-29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के लिए NEET (रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर) दर 30 प्रतिशत से कम दर्ज की गई।

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Aapki Baat News Desk
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