सराहां : मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सराहां में आयोजित राज्य स्तरीय श्री वामन द्वादशी मेले के समापन समारोह में भाजपा पर जमकर राजनीतिक हमला बोला। करीब 22 मिनट के संबोधन में मुख्यमंत्री ने जहां अपनी सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का बखान किया, वहीं भाजपा पर प्रदेश हितों के साथ खिलवाड़ करने के आरोप भी लगाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी जनसभा में मेरी जुबान स्लिप हो जाए तो भाजपा के दीप कमल कार्यालय में बैठे 40 लोगों की टीम उसका चुटकुला बना देती है, मगर प्रदेश की जनता वास्तविकता जानती है। उन्होंने कहा कि भाजपा को सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने से पहले अपने कार्यकाल के फैसलों का हिसाब प्रदेश की जनता को देना चाहिए।
सुक्खू ने पच्छाद की भाजपा विधायक का नाम लिए बिना निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा से पूछा जाना चाहिए कि बीबीएन में प्रदेश के हितों से जुड़े मामलों में किस तरह जमीन के सौदों को लेकर फैसले लिए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में 10 रुपये की चीज को 100 रुपये में खरीदा जाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता संभालने के बाद सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन के तहत ऐसे तौर-तरीकों को बदलने के लिए कड़े फैसले लिए हैं।
किशाऊ पर बोले- हिमाचल के संसाधनों का बोझ हिमाचल क्यों उठाए?
मुख्यमंत्री ने किशाऊ बांध परियोजना को लेकर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि पूर्व में ऐसा सहमति पत्र दिया गया था, जिसके तहत परियोजना का वित्तीय बोझ हिमाचल पर भी पड़ना था। उनकी सरकार ने केंद्र के समक्ष स्पष्ट किया कि हिमाचल अपनी संपदा पर बनने वाली परियोजना का पूरा आर्थिक बोझ नहीं उठाएगा।
सुक्खू ने कहा कि 16 जून को केंद्रीय गृह मंत्री के साथ बैठक में हिमाचल का पक्ष स्पष्ट रूप से रखा गया और सरकार ने अपनी शर्तों पर समझौता करवाया। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना से भविष्य में हिमाचल को करीब 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में दिल्ली, गुड़गांव सहित एनसीआर में पानी की भारी किल्लत हो सकती है। ऐसे समय में हिमाचल के जल संसाधनों का महत्व और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि “एनसीआर और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की प्यास हिमाचल के पानी से ही बुझेगी।”
उन्होंने कहा कि हिमाचल के जवानों ने देश के लिए सबसे ज्यादा बलिदान दिया है। ऐसे में जब प्रदेश की प्राकृतिक संपदा पर बड़ी परियोजनाएं बन रही हैं तो उसका पूरा आर्थिक बोझ हिमाचल की जनता पर डालना उचित नहीं है।
“पूर्व सरकार का कर्ज चुकाने के लिए हमें लेना पड़ रहा कर्ज”
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पिछली सरकार द्वारा छोड़े गए कर्ज और वित्तीय दायित्वों को चुकाने के लिए वर्तमान सरकार को भी कर्ज लेना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना बहाल की है और जो कर्मचारी अभी इससे वंचित हैं, उन्हें भी जल्द इसका लाभ देने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को डीए की किस्त भी जल्द दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा नेता वेतन और पेंशन को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हैं, लेकिन प्रदेश सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों को समय पर भुगतान कर रही है।
“2027 तक आत्मनिर्भर, 2032 में देश का सबसे समृद्ध राज्य”
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल के स्वर्णिम युग की शुरुआत हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर राज्य बनाना है और वर्ष 2032 तक देश के सबसे समृद्ध राज्यों की दिशा में प्रदेश को आगे ले जाना है।
उन्होंने कहा कि वह भी आम परिवार से निकलकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे हैं और पिछले चार वर्षों से प्रदेश के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के सामने चुनौतियां अंदर भी हैं और बाहर भी, लेकिन सरकार सभी चुनौतियों का सामना कर रही है।
गांवों को मजबूत करने पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल की करीब 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। इसलिए सरकार का ध्यान गांवों में बेहतर स्कूल, स्वास्थ्य संस्थान और सड़क सुविधा उपलब्ध करवाने पर है। ग्रामीण क्षेत्रों में सीबीएसई स्कूल खोले जा रहे हैं और सराहां में भी सीबीएसई स्कूल शुरू हो चुका है।
उन्होंने कहा कि किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए दूध का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। इससे ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ी है। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले समय में सिरमौर की प्रमुख नगदी फसल लहसुन के लिए भी समर्थन मूल्य निर्धारित करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अदरक का समर्थन मूल्य पहले ही निर्धारित किया जा चुका है और इसे भविष्य में और बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
आरडीजी बंद करने पर केंद्र को घेरा
सुक्खू ने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल को वर्ष 1955 से राजस्व घाटा अनुदान मिलता रहा है, लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद प्रदेश सरकार अपने संसाधनों के दम पर व्यवस्था को आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में एसजेवीएन का वार्षिक कारोबार करीब 67 हजार करोड़ रुपये है, जबकि प्रदेश सरकार का वार्षिक बजट करीब 54 हजार करोड़ रुपये है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की संपदा और संसाधनों से होने वाले आर्थिक लाभ में हिमाचल की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
विधवा महिलाओं के बच्चों की पढ़ाई के लिए नई योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विधवा महिलाओं के बच्चों के लिए नई योजना लाने जा रही है। इसके तहत बेटे की पढ़ाई के लिए 1,000 रुपये और बेटी की पढ़ाई के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह सहायता देने का प्रावधान किया जाएगा।
सराहां की जनसभा में मुख्यमंत्री का पूरा संबोधन भाजपा पर राजनीतिक पलटवार और हिमाचल के आर्थिक व प्राकृतिक संसाधनों पर प्रदेश का अधिकार जताने के मुद्दे के इर्द-गिर्द रहा। सुक्खू ने साफ संदेश देने की कोशिश की कि सरकार आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपने फैसलों को प्रदेश के हितों से जोड़कर आगे बढ़ा रही है।
