नाहन : हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र के लाखों श्रद्धालुओं के आराध्य देव छत्रधारी चालदा महासू महाराज 3 दिसंबर को शिलाई के पश्मी गांव से उत्तराखंड के मशक गांव के लिए रवाना होंगे।
पश्मी में एक वर्ष का प्रवास पूरा करने के बाद महाराज की विदाई यात्रा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस धार्मिक यात्रा में हिमाचल और उत्तराखंड से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। पश्मी मंदिर समिति महाराज की विदाई के लिए सोने और चांदी से तैयार की जा रही नई पालकी की व्यवस्था कर रही है।
दशहरे के अवसर पर चालदा महासू महाराज के वजीर दीवान सिंह राणा ने घोषणा की कि 12 नवंबर को पश्मी मंदिर से देव चिन्ह बाहर निकालकर मंदिर परिसर में स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद महाराज की विदाई यात्रा से जुड़ी धार्मिक गतिविधियां आगे बढ़ेंगी।
पांच दिन में मशक मंदिर पहुंचेंगे महाराज
चालदा महासू महाराज की वापसी यात्रा और रास्ते में पड़ने वाले पड़ावों को लेकर वजीर दीवान सिंह राणा की अध्यक्षता में पश्मी गांव में बैठक हुई। इसमें यात्रा कार्यक्रम तय करने के साथ ही विभिन्न स्थानों पर रात्रि विश्राम की व्यवस्था पर निर्णय लिया गया।
चालदा महासू महाराज मंदिर समिति पश्मी के अध्यक्ष प्रकाश चौहान और सदस्य प्रदीप टिंकू के अनुसार, महाराज 3 दिसंबर को पश्मी मंदिर से रवाना होकर द्राबिल में पहला रात्रि प्रवास करेंगे। यह हिमाचल प्रदेश में महाराज का एकमात्र रात्रि पड़ाव होगा। इसके बाद यात्रा उत्तराखंड में आगे बढ़ेगी।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 4 दिसंबर को बाईला भरम, 5 दिसंबर को तिलूर खेड़ा और 6 दिसंबर को काण्डोई भरम में रात्रि प्रवास होगा। इसके बाद 7 दिसंबर को महाराज मशक मंदिर में प्रवेश करेंगे। अगले देव आदेश तक चालदा महासू महाराज मशक के नवनिर्मित मंदिर में विराजमान रहेंगे।
सात दिन की पैदल यात्रा के बाद पहुंचे थे पश्मी
गौरतलब है कि चालदा महासू महाराज 14 दिसंबर 2025 को उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र के दसऊं गांव से सात दिन की पैदल यात्रा के बाद पश्मी पहुंचे थे। अब पश्मी से मशक तक की यात्रा भी पैदल पूरी की जाएगी। इस दौरान श्रद्धालु विभिन्न पड़ावों पर महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।
चांदी की पालकी में आए थे, अब सोने-चांदी की पालकी में होंगे विदा
चालदा महासू महाराज उत्तराखंड से चांदी की पालकी में पश्मी पहुंचे थे। अब उनकी विदाई के लिए पश्मी मंदिर समिति सोने और चांदी से मिलकर नई पालकी तैयार करवा रही है।
पश्मी में एक वर्ष के प्रवास के दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। अब विदाई यात्रा को लेकर दोनों राज्यों के श्रद्धालुओं में उत्सुकता है।

