पांवटा साहिब : युवती की हत्या से जुड़े करीब नौ साल पुराने मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पांवटा साहिब की अदालत ने आरोपी शारिक रहमान को हत्या, अपहरण और साक्ष्य मिटाने पर दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर अलग-अलग धाराओं के तहत 45 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। मामले में दो अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पांवटा साहिब कपिल शर्मा ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। अदालत ने मामले में शारिक रहमान पुत्र शाहिदुल रहमान, निवासी अमरगढ़, डाकघर पुरुवाला, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर को दोषी ठहराया है।
मामले की पैरवी उप जिला न्यायवादी जतिंदर शर्मा ने की। उन्होंने बताया कि 14 नवंबर 2017 को माजरा पुलिस थाने में वाजिद अली की शिकायत पर उनकी बेटी मुमताज की गुमशुदगी के संबंध में मामला दर्ज किया गया था। शुरुआती जांच एएसआई सुभाष चंद ने की। जांच के दौरान 12 दिन बाद मुमताज का शव हेवना मंदिर के पास ढांक में मिला।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल 37 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने शारिक रहमान को दोषी करार दिया। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया।
अदालत ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत 25 हजार रुपये, धारा 364 के तहत 15 हजार रुपये और धारा 201 के तहत 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया। मामले की जानकारी सहायक जिला न्यायवादी संदीपना ने साझा की।
