शिमला : नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार लगातार केंद्र सरकार से भरपूर सहयोग ले रही है, इसके बावजूद केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ गंभीर टिप्पणियां कर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वास्तविक मुद्दा यह नहीं है कि केंद्रीय बजट में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट का उल्लेख हुआ या नहीं, बल्कि असली प्रश्न यह है कि जब यह ग्रांट हिमाचल प्रदेश को मिल रही थी, तब भी राज्य सरकार वित्तीय संकट का रोना रो रही थी। 16वें वित्त आयोग की सिफारिश के बाद यदि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद हुई है तो वर्तमान कांग्रेस सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रभावी वित्तीय प्रबंधन करे और प्रदेश को आगे ले जाए। अपनी नाकामियों का दोष केंद्र या पूर्व सरकारों पर डालना समस्या का समाधान नहीं है। सरकार को स्वीकार करना चाहिए कि यदि वह स्थिति संभाल नहीं पा रही है तो जनता के सामने सच्चाई रखे।

नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होना परंपरा और नियम दोनों का हिस्सा है, लेकिन सरकार रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट पर राजनीतिक प्रस्ताव लाने पर आमादा थी। विपक्ष ने चर्चा में भाग लेकर तीन साल के कार्यकाल की नाकामियों को तथ्यों सहित रखा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान कई तथ्य गलत ढंग से प्रस्तुत किए गए और जब विपक्ष ने उन्हें सुधारने के लिए बोलने का अवसर मांगा तो अनुमति नहीं दी गई। ऐसी स्थिति में विरोध स्वरूप भाजपा विधायकों को सदन के वेल में जाना पड़ा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा हिमाचल प्रदेश के हितों के साथ खड़ी है और प्रदेश हित सर्वोपरि है। यदि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद हुई है तो सरकार को यह भी समझना चाहिए कि अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से रखने में उसकी विफलता भी इसका कारण हो सकती है। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक भाषणों से आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा, इसके लिए ठोस नीति और वित्तीय अनुशासन आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं बार-बार यह स्वीकार कर चुके हैं कि आने वाले समय में आर्थिक संकट बढ़ सकता है, गारंटियां पूरी करना कठिन होगा, विकास कार्य प्रभावित होंगे, कर्मचारियों के वेतन-पेंशन और डीए पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में संकट का राजनीतिकरण करने के बजाय समाधान पर ध्यान देना चाहिए। वित्त आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान 12वें और 13वें वित्त आयोग में हिमाचल प्रदेश को लगभग ₹18,000 करोड़ के आसपास अनुदान मिला, जबकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 14वें और 15वें वित्त आयोग के दौरान लगभग ₹89,254 करोड़ की सहायता मिली, जो पांच गुना से अधिक है। इससे स्पष्ट है कि हिमाचल के साथ वास्तविक अन्याय कब हुआ। पिछले चालीस साल में हिमाचल को मात्र 21 हजार करोड़ मिले, मोदी सरकार के कार्यकाल में 89 हजार करोड़ का राजस्व घाटा अनुदान मिला। यह भी रिकॉर्ड है। हिमाचल के लिए केंद्र सरकार लगातार बढ़ चढ़कर सहयोग कर रही है और सुक्खू सरकार आभार तो दूर सिर्फ कोसने का काम कर रही है।


