कांगड़ा : जिला उपभोक्ता आयोग कांगड़ा ने एक अहम फैसले में वाहन डीलर और कंपनी को उपभोक्ता से वसूली गई मरम्मत राशि लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने दोनों को संयुक्त रूप से निर्देश दिए हैं कि शिकायतकर्ता को 1,10,521 रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस की जाए। इसके साथ ही मानसिक परेशानियों के लिए 15 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये वाद खर्च के रूप में अदा करने के भी आदेश दिए गए हैं।
आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा और सदस्य नारायण ठाकुर व आरती सूद ने मामले को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए यह फैसला सुनाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कांगड़ा जिला के नगरोटा बगवां निवासी सरूप चंद ने 18 जून 2024 को एक नई ब्रेजा कार खरीदी थी। उन्होंने वाहन के साथ 16,484 रुपये की एक्सटेंडेड वारंटी भी ली थी, जो 17 जून 2029 या एक लाख किलोमीटर तक मान्य थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार 22 सितंबर 2025 को उनकी गाड़ी गोपालपुर के पास खराब हो गई। इसके बाद वाहन को डीलर के पास ले जाया गया, जहां जांच में इंजन चैंबर में खराबी बताई गई। आरोप है कि वारंटी के बावजूद गाड़ी को 45 दिनों तक रोके रखा गया और बाद में मरम्मत के नाम पर 1,10,521 रुपये की मांग की गई। मजबूरी में उपभोक्ता ने यह राशि जमा कर दी।
बाद में उपभोक्ता ने इसे सेवा में कमी बताते हुए आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान डीलर और कंपनी की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते मामला एकतरफा चला। आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों को सही मानते हुए कहा कि वारंटी के तहत आने वाली मरम्मत के लिए शुल्क लेना गलत है। साथ ही यह भी माना गया कि कंपनी के वाहन के पार्ट्स उपलब्ध न होना और गाड़ी को 45 दिन तक रोके रखना भी स्पष्ट रूप से सेवा में कमी है, जिसके आधार पर यह आदेश पारित किए गए।
