शिमला : हिमाचल प्रदेश में चिट्टा (सिंथेटिक ड्रग) के खिलाफ सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब चिट्टा मामलों में चार्जशीट हो चुके आरोपी पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है और सरकार इसे लागू करने के लिए जल्द ही विधानसभा में विधेयक लाने जा रही है।
मंत्रिमंडल के फैसले के अनुसार, जिन लोगों पर चिट्टा या अन्य सिंथेटिक ड्रग्स से जुड़े मामले दर्ज हैं या जिनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, उन्हें पंचायत चुनाव में भाग लेने से रोका जाएगा। प्रदेश में इस तरह का प्रावधान पहली बार लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को साफ और पारदर्शी बनाना है।
सरकार इस निर्णय को कानूनी रूप देने के लिए विधानसभा में विधेयक पेश करेगी। विधेयक पारित होने और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह नियम प्रभावी हो जाएगा। संभावना है कि आने वाले पंचायत चुनावों में ही इसका असर दिखाई देगा।
सरकार की योजना इस व्यवस्था को केवल पंचायत चुनावों तक सीमित रखने की नहीं है। आने वाले समय में नगर निकाय चुनावों में भी ऐसे प्रावधान लागू करने की तैयारी है, ताकि नशे से जुड़े लोगों को राजनीति से दूर रखा जा सके।
इसके साथ साथ सीबीएसई स्कूलों में 2068 शिक्षकों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई है। 151 सीबीएसई स्कूलों में 2068 शिक्षकों को नीति के तहत रखा जाएगा। इसके अलावा खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध पर भी राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा की गई। इसमें पाइपों से सभी प्रमुख शहरों के लिए पीएनजी आपूर्ति करने का निर्णय लिया गया।
सभी पेट्रोलियम कंपनियों को इस बारे में सुविधाएं देने पर मंत्रणा हुई। शिमला शहर सहित प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में पाइप से रसोई गैस पहुंचाने के लिए तेल कंपनियों को लैंड सीलिंग एक्ट में पाइप लाइन बिछाने की स्वीकृति प्रदान करने का रास्ता निकाला गया है। मंत्रिमंडल बैठक में एंट्री टैक्स लगाने पर अनौपचारिक चर्चा की गई, लेकिन फैसला नहीं हुआ। इस टैक्स को ग्रीन टैक्स या किस रूप में लगाया जा सकता है और इसका कितना लाभ प्रदेश के कोष में होगा। इस पर प्रस्तुति दी गई।
वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए हमीरपुर, नेरचौक और शिमला के आईजीएमसी मेडिकल कॉलेजों में ‘बायो-फिजिक्स’ विभाग शुरू करने का फैसला हुआ है। इसके अलावा नाहन मेडिकल कालेज को शहर से बाहर बदलने को लेकर स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय उप समिति की रिपोर्ट भी कैबिनेट बैठक में रखी गई। इस रिपोर्ट को मंजूरी दी गई। इसके बाद नाहन मेडिकल कॉलेज शहर से बाहर स्थानांतरित होगा।
बैठक में नगर निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के तरीके को लेकर भी लंबी बातचीत हुई। सरकार ने फिलहाल पुरानी व्यवस्था को ही बरकरार रखने का फैसला किया है, यानी जनता सीधे चुनाव नहीं करेगी बल्कि चुने हुए पार्षद ही अपने अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। हालांकि शहरी विकास विभाग ने सीधे चुनाव का प्रस्ताव दिया था, लेकिन मंत्रियों की सहमति न बनने और पुराने अनुभवों को देखते हुए इसे टाल दिया गया।



