धौलाकुआं : क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं (सिरमौर) में गुरूवार को एक तरफ जहां किसानों को आय बढ़ाने के नए गुर सिखाए गए, वहीं दूसरी ओर स्कूली विद्यार्थियों को आधुनिक बागवानी तकनीकों से रूबरू कराया गया। आरकेवीवाई परियोजना के तहत आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में गुज्जर समुदाय से जुड़े 15 किसानों को “गेंदा एवं पुष्पीय एकवर्षीय फसलों के बीज उत्पादन” के माध्यम से आजीविका मजबूत करने के उपाय बताए गए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत एवं परिचय सत्र से हुई, जिसमें प्रतिभागियों को कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी गई। एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. प्रियंका ठाकुर ने आम, सिट्रस, अमरूद और ड्रैगन फ्रूट जैसे फलदार वृक्षों के साथ शीतकालीन एकवर्षीय फसलों की अंतरवर्तीय खेती की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से भूमि और संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और फलदार पौधों के शुरुआती गैर-उत्पादक वर्षों में भी किसानों को अतिरिक्त आय मिल सकती है। साथ ही गेंदा और अन्य पुष्पीय फसलों के गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन को आय का प्रभावी साधन बताया गया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, उपयुक्त किस्मों के चयन, बीज उत्पादन की विधियों और कटाई उपरांत प्रबंधन की जानकारी दी गई। इंटरएक्टिव सत्र में किसानों ने अपनी समस्याएं साझा कीं और व्यावहारिक समाधान प्राप्त किए। इस दौरान सहायक प्राध्यापक डॉ. शिल्पा ने फल फसलों की वैज्ञानिक खेती के अनुभव साझा किए, जबकि यंग प्रोफेशनल-II डॉ. सिमरन कश्यप ने बीज उत्पादन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। ग्रेड-I राकेश ने कार्यक्रम के संचालन में सहयोग किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और किसानों ने पुष्प बीज उत्पादन को अतिरिक्त आय के रूप में अपनाने में रुचि दिखाई।
इसी दिन संस्थान में एक शैक्षणिक भ्रमण का भी आयोजन किया गया, जिसमें राजकीय उच्च विद्यालय कांसर और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बिरला के कुल 39 विद्यार्थियों ने भाग लिया। भ्रमण के दौरान एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. प्रियंका ठाकुर ने विद्यार्थियों को पुष्प फसलों की खेती और पीपीवी एंड एफआरए परियोजना के तहत डहलिया, गुलदाउदी, कैलेंडुला सहित अन्य मौसमी फूलों के उत्पादन की जानकारी दी। उन्होंने उत्पादन तकनीक और कटाई उपरांत प्रबंधन पर भी विस्तार से बताया और प्राकृतिक खेती की अवधारणा से अवगत कराया।
डॉ. शिल्पा ने विद्यार्थियों को लीची, आम, सिट्रस, अमरूद, जापानी फल और सेब जैसी फसलों की नर्सरी उत्पादन तकनीकों के बारे में जानकारी दी और गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने की वैज्ञानिक विधियों पर जोर दिया। उन्होंने खैरी फार्म में अपनाई जा रही अंतःफसली (इंटरक्रॉपिंग) प्रणाली के बारे में भी बताया, जिससे भूमि का समुचित उपयोग और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलता है। डॉ. सिमरन ने भी विद्यार्थियों को पुष्प उत्पादन एवं प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हुआ, जिससे उनमें बागवानी और आधुनिक कृषि के प्रति रुचि बढ़ी।


