राजगढ़ : पझौता घाटी के जालग गांव स्थित हाब्बी मानसिंह कला केंद्र में डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलने के उपलक्ष्य में आभारोत्सव आयोजित किया गया। समारोह में डॉ. हाब्बी की लंबी सांस्कृतिक यात्रा में सहयोग देने वाले 200 से अधिक कलाकारों, साहित्यकारों, संस्कृति कर्मियों, अधिकारियों और कला प्रेमियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
हाब्बी मानसिंह कला केंद्र के सह प्रभारी एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित युवा कलाकार गोपाल हाब्बी ने बताया कि आभारोत्सव का उद्देश्य डॉ. जोगेंद्र हाब्बी की सांस्कृतिक यात्रा में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले लोगों के प्रति आभार व्यक्त करना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष एवं भाषा एवं संस्कृति विभाग के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. प्रेम शर्मा रहे, जबकि पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ लोक कलाकार एवं साहित्यकार विद्यानंद सरैक ने समारोह की अध्यक्षता की। भारतीय दूतावास अफगानिस्तान के सेवानिवृत्त द्वितीय सचिव एवं आईसीसीआर के वरिष्ठ कार्यक्रम निदेशक ज्ञानचंद गर्ग अति विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
इस अवसर पर डॉ. हुकुम शर्मा, बाबूराम चौहान, जयप्रकाश चौहान, मदन हिमाचली, दिलीप विशिष्ट, जगमोहन मेहता, प्रेमपाल आर्य, शकुंतला प्रकाश, शेरजंग चौहान और यशपाल कपूर सहित संस्कृति, साहित्य और लोक विधाओं से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में डॉ. जोगेंद्र हाब्बी ने कहा कि उनकी सांस्कृतिक यात्रा शून्य से शुरू हुई और आज तक के सफर में उन्हें अनेक लोगों का सहयोग, मार्गदर्शन और प्रेरणा मिली।
उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित उनकी उपलब्धियां किसी एक व्यक्ति की नहीं हैं। इनमें सांस्कृतिक दल के कलाकारों की मेहनत, गुरु पद्मश्री विद्यानंद सरैक का मार्गदर्शन और अधिकारियों, संस्कृति कर्मियों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, वरिष्ठ कलाकारों तथा दर्शकों का निरंतर प्रोत्साहन शामिल है।
मुख्य अतिथि डॉ. प्रेम शर्मा ने कहा कि डॉ. जोगेंद्र हाब्बी लंबे समय से लोक विधाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए काम कर रहे हैं। पद्मश्री विद्यानंद सरैक ने डॉ. हाब्बी के साथ अपने लंबे सांस्कृतिक जुड़ाव और उनके मार्गदर्शन में तैयार की गई विभिन्न लोक विधाओं की जानकारी साझा की।
सोलन के लेखक एवं साहित्यकार मदन हिमाचली ने कहा कि डॉ. हाब्बी ने पारंपरिक लोक विधाओं को संरक्षित और संवर्धित करने के साथ देश-विदेश में हिमाचल की लोक संस्कृति को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संस्कृति दल के वरिष्ठ कलाकार रामलाल वर्मा ने कहा कि वह पिछले करीब 30 से 35 वर्षों से डॉ. जोगेंद्र हाब्बी की सांस्कृतिक यात्रा के साक्षी रहे हैं। उन्होंने बताया कि डॉ. हाब्बी ने कभी व्यक्तिगत सम्मान को प्राथमिकता नहीं दी और कई मौकों पर स्वयं सम्मान लेने के बजाय सांस्कृतिक दल के वरिष्ठ कलाकार को भेजा।
समारोह में संस्था की वरिष्ठ महिला कलाकार सरोज कुमारी ने हाब्बी मानसिंह कला केंद्र की विभिन्न गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यों की जानकारी दी।
माननेश्वर लोक वाद्य दल के कलाकारों ने पारंपरिक लोक वाद्य वादन की प्रस्तुति दी। जिला सिरमौर के लोक गायक धर्मपाल ठाकुर और उनके साथियों ने नाटियों की प्रस्तुति देकर माहौल को संगीतमय बना दिया।
आभारोत्सव में सिरमौर, सोलन और शिमला जिलों के कलाकारों एवं कला प्रेमियों के साथ जालग, द्राबला, शलहेच, नरोट, रोहड़ी, रिटब, हाब्बन और आसपास के गांवों से आए सैकड़ों ग्रामीणों ने भी भाग लिया।