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नाहन नगर परिषद चुनाव बना सियासी रणक्षेत्र! बिंदल-सोलंकी की प्रतिष्ठा दांव पर, हर वार्ड में सत्ता और साख की जंग

हालांकि, ये चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं लड़े जा रहे, लेकिन शहर के हर वार्ड में अब मुकाबला सिर्फ प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा, संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक पकड़ के बीच माना जा रहा है।

नाहन : नगर परिषद नाहन का चुनाव इस बार स्थानीय निकाय की सीमाओं से निकलकर प्रदेश स्तर की राजनीति का बड़ा शक्ति परीक्षण बन चुका है। हालांकि, ये चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं लड़े जा रहे, लेकिन शहर के हर वार्ड में अब मुकाबला सिर्फ प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा, संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक पकड़ के बीच माना जा रहा है। भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल मोर्चा संभाले हुए हैं, जबकि कांग्रेस की कमान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के करीबी विधायक अजय सोलंकी के हाथों में है।

इस समय सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड नंबर-2 की हो रही है। यह सांसद सुरेश कश्यप का गृह वार्ड है, जहां पहली मर्तबा मनीष जैन भाजपा समर्थित प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस ने यहां लगातार दूसरी बार नरेंद्र तोमर को उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें विधायक अजय सोलंकी का करीबी माना जाता है। ऐसे में इस वार्ड को सीधे सांसद बनाम विधायक की प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस सीट को लेकर सबसे ज्यादा हलचल दिखाई दे रही है।
वार्ड नंबर-1 भी इस बार हाई प्रोफाइल सीट बन गया है। भाजपा के शुभम सैनी और कांग्रेस के कपिल गर्ग उर्फ मोंटी आमने-सामने हैं। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही प्रत्याशी वार्ड के स्थायी निवासी नहीं हैं। इसे लेकर शहर की राजनीति में चर्चाएं तेज हैं कि दोनों दलों को इस वार्ड से क्यों कोई स्थानीय चेहरा नहीं मिल पाया। हालांकि दोनों उम्मीदवार नगर परिषद चुनावों का अनुभव रखते हैं और अपने-अपने राजनीतिक नेटवर्क के दम पर चुनावी मैदान में डटे हुए हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के प्रभाव वाले वार्ड नंबर-5 को भी भाजपा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा ने यहां पूर्व पार्षद मधु अत्री की पुत्रवधू सीमा अत्री को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने पहली बार सबीना पर भरोसा जताया है। इस सीट को सीधे तौर पर डॉ. बिंदल की राजनीतिक पकड़ और संगठन की ताकत की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
वार्ड नंबर-6 में कांग्रेस ने अपना सबसे मजबूत दांव खेला है। यहां के स्थानीय निवासी योगेश गुप्ता उर्फ सुक्खू भाई को कांग्रेस का मजबूत चेहरा माना जा रहा है। शहर की राजनीति में उनकी पकड़ को काफी प्रभावशाली माना जाता है। भाजपा ने यहां पूर्व मंत्री श्याम शर्मा के परिवार से जुड़े चेहरे अर्पिता बक्शी को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बनाने की कोशिश की है, लेकिन कांग्रेस इस वार्ड में काफी मजबूत नजर आ रही है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि योगेश गुप्ता अभी तक अपना चुनाव नहीं हारे। यहां तक कि उन्होंने दूसरे वार्डों से भी चुनाव जीते हैं।
विधायक अजय सोलंकी के प्रभाव वाले वार्ड नंबर-9 में भी मुकाबला पूरी तरह प्रतिष्ठा से जुड़ चुका है। भाजपा ने कौशल्या देवी और कांग्रेस ने कुसुम तोमर को मैदान में उतारा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट का परिणाम विधायक सोलंकी की जमीनी पकड़ का बड़ा संकेत देगा। चूंकि विधायक अजय सोलंकी इसी वार्ड के निवासी हैं।
वार्ड नंबर-12 में कांग्रेस ने युवा और सामाजिक समीकरणों को साधते हुए राकेश चन्ना पर दांव लगाया है। भाजपा ने यहां अनुभवी चेहरा प्रदीप सहोत्रा को उम्मीदवार बनाया है। यह क्षेत्र भाजपा नेता अविनाश गुप्ता का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, लेकिन कांग्रेस यहां युवा वोट बैंक और सामाजिक सक्रियता के सहारे बड़ा उलटफेर करने की तैयारी में दिखाई दे रही है।
वार्ड नंबर-7 में कांग्रेस समर्थित राकेश गर्ग उर्फ पपली की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। भाजपा ने यहां पहली बार अभिषेक चौधरी को मैदान में उतारा है। राजनीतिक हलकों में यहां तक चर्चा है कि ये सीट भाजपा प्रत्याशी के लिए काफी चुनौतिपूर्ण है। अगर पिछले चुनाव को देखा जाए तो अधिकतर यहां से कांग्रेस प्रत्याशी को ही सफलता मिली है।
वार्ड नंबर-4 भावनात्मक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम बन गया है। यह क्षेत्र पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष स्व. रेखा तोमर का वार्ड रहा है। भाजपा ने उनकी पुत्रवधू पूजा तोमर उर्फ मोना को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने यहां श्रद्धा शर्मा को उम्मीदवार बनाया है और मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश की है।
इसके अलावा वार्ड नंबर-3, 8, 10, 11 और 13 में भी मुकाबले पूरी तरह स्थानीय समीकरणों और राजनीतिक ध्रुवीकरण के बीच फंसे हुए हैं। दोनों दल इन वार्डों में भी पूरी ताकत झोंके हुए हैं, क्योंकि छोटे अंतर से मिलने वाली जीत या हार नगर परिषद के सत्ता समीकरण बदल सकती है। निर्दलीय उम्मीदवार भी कई वार्डों में मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में अहम भूमिका निभाते दिखाई दे रहे हैं।
अब पूरा चुनाव इस सवाल पर टिक गया है कि क्या भाजपा का मजबूत संगठन और डॉ. राजीव बिंदल का प्रभाव नगर परिषद पर एक बार फिर कब्जा बरकरार रख पाएगा या फिर विधायक अजय सोलंकी अपने जमीनी नेटवर्क और कांग्रेस की रणनीति के दम पर भाजपा के सियासी किले में सेंध लगाने में सफल होंगे। नाहन नगर परिषद चुनाव फिलहाल प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित स्थानीय सियासी मुकाबला बन चुका है। भले ही ये चुनाव छोटी सरकार का है, लेकिन साख बड़े नेताओं की दांव पर लगी हुई है।
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Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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