Home Himachal Sirmaur शिरगुल महाराज की जन्मस्थली शाया में ‘देवाज्ञा’ से टूटा आमरण अनशन

शिरगुल महाराज की जन्मस्थली शाया में ‘देवाज्ञा’ से टूटा आमरण अनशन

अनशन समाप्त होने के बाद रविंद्र कंवर ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि शिरगुल महाराज किसी स्थानीय माध्यम से उनके प्रयास का समर्थन करेंगे और देवता के आदेश के बाद ही उन्होंने अन्न-जल ग्रहण किया।

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राजगढ़ : शिरगुल महाराज की जन्मस्थली शाया में ‘नौ तबीन’ की एकता को लेकर चल रहा आमरण अनशन तीसरे दिन देवाज्ञा के साथ समाप्त हो गया। देवा रविंद्र कंवर को शिरगुल देवता के देवा वेद प्रकाश ने जल पिलाकर अनशन खुलवाया। तीन दिन से अन्न-जल त्याग कर बैठे रविंद्र कंवर सामाजिक सौहार्द और तबीनों के बीच आपसी मतभेद खत्म करने की मांग कर रहे थे।

थानाधार गांव निवासी देवा रविंद्र कंवर का कहना था कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या तबीन का विरोध नहीं, बल्कि सभी तबीनों को एक सूत्र में जोड़कर शिरगुल महाराज की प्रजा में समरसता स्थापित करना है। तीसरे दिन स्थानीय देवा में महाराज की हवा आने के दौरान पुजारी को सभी को बुलाकर बैठक करने के निर्देश दिए गए। इसी क्रम में देवा वेद प्रकाश के माध्यम से महाराज की कृपा प्रकट होने पर रविंद्र कंवर को जल पिलाकर अनशन समाप्त करवाया गया।

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अनशन समाप्त होने के बाद रविंद्र कंवर ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि शिरगुल महाराज किसी स्थानीय माध्यम से उनके प्रयास का समर्थन करेंगे और देवता के आदेश के बाद ही उन्होंने अन्न-जल ग्रहण किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी तबीनों के एकजुट होकर महाराज के कार्यों को आगे बढ़ाने तक वे मंदिर के बाहर ही बैठे रहेंगे।

गौरतलब है कि शिरगुल महाराज के लिए भव्य मंदिर निर्माण का कार्य जारी है। उनका मानना है कि प्रजा की एकजुटता से ही यह आध्यात्मिक और सामाजिक प्रयास सफल होगा। देवाज्ञा से समाप्त हुए इस अनशन के बाद समाज में उम्मीद जताई जा रही है कि ‘नौ तबीन’ एक मंच पर आकर आपसी मतभेद भुलाकर एकता की नई मिसाल पेश करेंगे।

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