उपमुख्यमंत्री ने आईआईआईटी ऊना के वार्षिक टेक्निकल फेस्टिवल ‘मेराकी-2026’ का किया शुभारंभ

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि टेकफेयर जैसे मंच युवाओं को नवाचार, सृजनशीलता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार एक सशक्त डिजिटल इकोसिस्टम के निर्माण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। कहा कि कुछ वर्ष पहले तक यह कल्पना करना भी कठिन था कि ऊना की धरती पर ट्रिपल आईटी जैसा प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित होगा। यह संस्थान किसी तश्तरी में परोसकर नहीं मिला, बल्कि लंबे संघर्ष और अनेक बाधाओं को पार करते हुए स्थापित हुआ है।

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ऊना : उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने शनिवार को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान ऊना के वार्षिक टेक्निकल फेस्टिवल ‘मेराकी-2026’ का शुभारंभ किया। यह टेकफेयर 7 से 9 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने मेराकी-2026 के लोगो और संस्थान की पत्रिका ‘प्रगति परिमल’ का भी विमोचन किया। अपने संबोधन में उन्होंने ड्रोन तकनीक और रोबोटिक्स के क्षेत्र में कार्य करने पर विशेष बल दिया। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन तकनीक की आवश्यकता स्पष्ट रूप से महसूस हुई। ऐसे अनुभव यह दर्शाते हैं कि भविष्य में सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक की भूमिका अत्यंत निर्णायक होगी। उन्होंने युवाओं और तकनीकी संस्थानों से आह्वान किया कि वे इस दिशा में गंभीरता से कार्य करें, ताकि भारत ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र बन सके।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि टेकफेयर जैसे मंच युवाओं को नवाचार, सृजनशीलता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार एक सशक्त डिजिटल इकोसिस्टम के निर्माण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। कहा कि कुछ वर्ष पहले तक यह कल्पना करना भी कठिन था कि ऊना की धरती पर ट्रिपल आईटी जैसा प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित होगा। यह संस्थान किसी तश्तरी में परोसकर नहीं मिला, बल्कि लंबे संघर्ष और अनेक बाधाओं को पार करते हुए स्थापित हुआ है। आज यहां हिमाचल के अनेक बच्चे अत्याधुनिक तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने संस्थान में एमएससी गणित पाठ्यक्रम के आरंभ की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्र में इसकी लंबे समय से मांग थी। अब इस पाठ्यक्रम के शुरू होने से स्थानीय विद्यार्थियों को बड़ा लाभ मिला है।

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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान द्वारा स्थानीय युवाओं के लिए जो नए अवसर खोले गए हैं, उनका दीर्घकालीन लाभ क्षेत्र और प्रदेश दोनों को मिलेगा। तकनीक, ज्ञान और अनुसंधान का आदान-प्रदान विकसित भारत की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि आईआईआईटी ऊना द्वारा ऊना-हरोली क्षेत्र के लगभग एक हजार युवाओं के कौशल विकास के लिए विशेष पहल की जा रही है, जिस पर लगभग एक करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। उन्होंने संस्थान से अपेक्षा जताई कि यह पहल जमीनी तौर पर दिखाई दे व परिणामोन्मुख हो। क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कभी पानी की समस्या से जूझने वाला यह क्षेत्र आज सिंचाई सुविधाओं से सशक्त हो रहा है। किसान नकदी फसलें उगा रहे हैं और शिक्षा, सड़क और आधारभूत ढांचे में व्यापक सुधार हुआ है।

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उन्होंने बताया कि हरोली में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत का बल्क ड्रग पार्क स्थापित किया जा रहा है, जो देश के तीन बल्क ड्रग पार्कों में से एक है। इसकी टेंडर प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त बाथू में 18 करोड़ रुपये की लागत से टूल रूम और पंडोगा में 10 करोड़ रुपये की लागत से टेक्नोलॉजी पार्क का निर्माण किया जा रहा है। तीन महत्वपूर्ण एमओयू का आदान-प्रदान कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री की उपस्थिति में आईआईआईटी ऊना द्वारा शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान किया गया। ये एमओयू सीएसआईआर सीएसआईओ चंडीगढ़, सरदार बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी गुरदासपुर और सिद्धार्था इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी हैदराबाद के साथ किए गए। इन समझौतों से संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान, कौशल विकास और नवाचार के नए अवसर सृजित होंगे।

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उपमुख्यमंत्री ने संस्थान के स्पोर्ट्स इवेंट ‘यलगार’, सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं एवं नवाचार स्पर्धाओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। इसके उपरांत उन्होंने इनोवेशन एक्सपो का अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नवाचारी परियोजनाओं की सराहना की। उन्होंने परिसर में बरगद का पौधा भी रोपित किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर के निदेशक प्रोफेसर हीरालाल मुरलीधर सूर्यवंशी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी तकनीक को सशक्त करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से जॉब सीकर से जॉब प्रोवाइडर बनने, असफलताओं से सीखने और रचनात्मकता व आत्मविश्वास विकसित करने का आह्वान किया।