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ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हवाई बुनियादी ढांचे को बनाया निशाना, मिसाइल-ड्रोन से हमले

इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने ‘टू प्रॉमिस 4’ ऑपरेशन के तहत अमेरिका और इजरायल से जुड़े हवाई और ड्रोन बुनियादी ढांचे के साथ-साथ क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

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तेहरान से आई एजेंसी रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने ‘टू प्रॉमिस 4’ ऑपरेशन के तहत अमेरिका और इजरायल से जुड़े हवाई और ड्रोन बुनियादी ढांचे के साथ-साथ क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। बताया गया कि रविवार तड़के शुरू हुए इस अभियान में मिसाइल और ड्रोन हमलों की नई लहर चलाई गई, जिसमें कई रणनीतिक ठिकानों पर समन्वित कार्रवाई की गई।

ईरान की अर्ध-सरकारी तसनीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, आईआरजीसी ने कहा है कि ऑपरेशन की 86वीं लहर कई चरणों में शुरू की गई, जिसमें उसकी एयरोस्पेस फोर्स और नौसेना ने मिलकर क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाया। शुरुआती चरण में विक्टोरिया, आरिफजान और अल खर्ज जैसे अमेरिकी ठिकानों पर हवाई और ड्रोन ऑपरेशनल ढांचे और हथियार भंडार को टारगेट किया गया। इसके बाद के चरणों में अराद, नेगेव, तेल अवीव, एरबिल, अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट और अल धफरा समेत कई जगहों पर हमले किए जाने का दावा किया गया है।

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इस बीच, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास अपनी पकड़ मजबूत होने का दावा करते हुए कहा है कि उसके दबाव के चलते अमेरिकी जहाजों को पीछे हटना पड़ा है। ईरानी नौसेना के एक कमांडर ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी जहाज उनकी रेंज में आए, तो उन्हें तटीय मिसाइलों से निशाना बनाया जाएगा। ईरान का यह भी दावा है कि उसके मिसाइल मूवमेंट के कारण अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को सैकड़ों मील दूर जाना पड़ा।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के कई अहम मिसाइल ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। ईरान के चार प्रमुख बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण केंद्रों और कम से कम 29 लॉन्च साइट्स को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

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उधर, अमेरिका के भीतर भी इस तनाव का असर दिख रहा है। वॉशिंगटन डीसी समेत पूरे देश में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ‘नो किंग्स रैली’ के तहत बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 50 राज्यों में 3,300 से ज्यादा जगहों पर करीब 80 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव, सख्त इमिग्रेशन नीतियों और महंगाई को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और ट्रंप व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को पद से हटाने की मांग उठाई।