नाहन : शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने मंगलवार को जिला सिरमौर के नाहन में हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा संगम शिक्षा व्यवस्था पर आयोजित जिला स्तरीय सम्मेलन की अध्यक्षता की। उन्होंने प्रधानचार्यों समेत स्कूल मुखियाओं और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग राज्य का सबसे बड़ा विभाग है, जिसे सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्कूल कलस्टर प्रणाली की पहल राज्य सरकार द्वारा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने राजकीय पाठशालाओं में गिरती पंजीकरण दर पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लक्ष्य के साथ स्कूल कलस्टर प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से अलग-थलग पड़े एकल विद्यालयों की समस्या को समाप्त करने की दिशा में यह पहल की जा रही है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश साक्षरता दर में संपूर्ण भारत में सबसे आगे है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता में भी कार्य करने की आवश्यकता है, जिसके लिए एकत्रीकरण की ओर विभाग को ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा विभाग को सुदृढ़ करने के लिए विभाग की वर्तमान की चुनौतियों और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर कार्य किया जा रहा है। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों की समस्याओं को भी सुना।
शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने स्कूल कलस्टर प्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए कहा कि विद्यालय विद्यार्थियों और अध्यापकों से बनते है और वर्तमान में राजकीय शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उन्होंने अध्यापकों से शिक्षा एवं विद्यार्थियों के हित के लिए कार्य करने का आह्वान करते हुए परिस्थितियों व समय के अनुरूप ढलने के लिए कहा।
उन्होंने बताया कि विद्यालयों में पहली से पांचवी कक्षा में हिमाचल प्रदेश में 48 प्रतिशत पंजीकरण है, जबकि जिला सिरमौर में 61.2 प्रतिशत पंजीकरण है। हिमाचल प्रदेश के राजकीय स्कूलों में छठी से आठवीं कक्षा में 57.3 प्रतिशत पंजीकरण है, जबकि जिला सिरमौर में 71 प्रतिशत पंजीकरण दर्ज है। कक्षा नौवीं व दसवीं में राज्य में 62.5 प्रतिशत पंजीकरण है, जबकि जिला सिरमौर में 73.8 प्रतिशत और कक्षा ग्यारहवीं व बारहवीं में राज्य में 71.2 प्रतिशत पंजीकरण है और जिला सिरमौर में 77.4 प्रतिशत पंजीकरण है।
जिला सिरमौर के राजकीय प्राथमिक पाठशालाओं में 55.7 प्रतिशत विद्यालयों में 20 से कम विद्यार्थी हैं व 38.1 प्रतिशत विद्यालयों में 21 से 60 विद्यार्थी हैं। उन्होंने बताया कि जिला में 93.8 प्रतिशत विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 60 से कम है। इसके अतिरिक्त जिला सिरमौर के 96 प्रतिशत राजकीय माध्यमिक पाठशालाओं में भी विद्यार्थियों की संख्या 60 से कम है।
शिक्षा सचिव ने कहा कि स्कूल कलस्टर प्रणाली का उद्देश्य शिक्षकों के सहयोग से प्री-प्राइमरी से बाहरवीं तक की शिक्षा को मिलकर सुदृढ़ करना है, जिसमें विद्यार्थी केंद्रित प्रणाली के साथ-साथ गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि स्कूल कलस्टर प्रणाली का उदेश्य राजकीय विद्यालयों में छात्रों के पंजीकरण की संख्या में वृद्धि करना भी है।
उन्होंने कहा कि स्कूल कलस्टर प्रणाली के माध्यम से शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा निति व समग्र शिक्षा नीति को ध्यान में रखते हुए शिक्षा प्रणाली तैयार की जाएगी। उन्होंने अध्यापकों को बेहतर शिक्षा प्रणाली में सहयोग देने के लिए प्रेरित किया और अध्यापकों से आज से 10 साल बाद की हिमाचल की शिक्षा प्रणाली को एक मिसाल बनाने की दिशा में कार्य करने को कहा। उन्होंने राजकीय विद्यालयों में किए जा रहे सराहनीय कार्यों को बढ़ावा देने का आह्वान किया और कहा कि सराहनीय कार्य कर रहे विद्यालयों को सम्मानित किया जाएगा।
इस अवसर पर यूडीआईएसई और हिमाचल प्रदेश विद्या शिक्षा केंद्र ने भी विस्तृत प्रस्तुति दी। निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली ने संगम शिक्षा व्यवस्था पर आयोजित जिला स्तरीय सम्मेलन पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा प्रणाली के उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों व अध्यापकों को मिलकर शिक्षा क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए कहा।
इस अवसर पर डीसी सिरमौर प्रियंका वर्मा भी मौजूद रहीं। उपनिदेशक उच्च शिक्षा डॉ. हिमेंद्र चंंद्र बाली ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में गुणवत्ता नियंत्रण उप शिक्षा निदेशक रीता गुप्ता, उप निदेशक प्रारंभिक राजीव ठाकुर सहित जिला के प्रधानाचार्य व शिक्षक भी उपस्थित रहे।



