सिरमौर के दूरदराज गांवों से निकले इन ‘हीरों’ ने रचा इतिहास, पहाड़ जैसे बुलंद हौसलों के साथ आगे बढ़े और पास की UGC NET-JRF परीक्षा

सिरमौर जिले के लिए यह गर्व का क्षण है, जब जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से निकले होनहारों ने यूजीसी नेट और जेआरएफ (UGC NET-JRF) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। पुन्नरधार की सरीना, धरोटी गांव के रोबिन, टिकरी गांव की सीमा और पझौता घाटी के शैलेंद्र की यह उपलब्धि संघर्ष, निरंतर प्रयास और मजबूत संकल्प की मिसाल बनकर सामने आई है।

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राजगढ़/संगड़ाह : सिरमौर जिले के लिए यह गर्व का क्षण है, जब जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से निकले होनहारों ने यूजीसी नेट और जेआरएफ (UGC NET-JRF) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। पुन्नरधार की सरीना, धरोटी गांव के रोबिन, टिकरी गांव की सीमा और पझौता घाटी के शैलेंद्र की यह उपलब्धि संघर्ष, निरंतर प्रयास और मजबूत संकल्प की मिसाल बनकर सामने आई है।

नौहराधार तहसील के गांव पुन्नरधार की रहने वाली सरीना कुमारी ने वाणिज्य विषय में यूजीसी नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। सरीना के पिता राजेंद्र सिंह राजगढ़ बाजार में दुकान चलाते हैं, जबकि माता राधा देवी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। सरीना ने बिना किसी कोचिंग के यह परीक्षा पास कर यह साबित किया है कि आत्मविश्वास और मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने वर्ष 2019 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजगढ़ से 12वीं, वर्ष 2022 में राजकीय महाविद्यालय राजगढ़ से बीकॉम और वर्ष 2025 में केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला से एम कॉम की डिग्री प्राप्त की है। कॉमर्स विषय में प्रोफेसर बनना सरीना के जीवन लक्ष्य है। उनकी सफलता से पुन्नरधार गांव में खुशी का माहौल है और क्षेत्र के युवा उनसे प्रेरणा ले रहे हैं।

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वहीं राजगढ़ कस्बे से सटे धरोटी गांव के रोबिन ठाकुर ने समाजशास्त्र विषय में यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। रोबिन ने अखिल भारतीय स्तर पर 91वां स्थान प्राप्त करते हुए 99.66 परसेंटाइल स्कोर किया है। उनके पिता संजू ठाकुर किसान हैं, जबकि माता वंदना ठाकुर गृहिणी हैं। वर्तमान में रोबिन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में समाजशास्त्र विषय में एमए की पढ़ाई कर रहे हैं। जेआरएफ उत्तीर्ण करने के साथ ही उन्हें पीएचडी में प्रवेश का अवसर मिलेगा और भारत सरकार की ओर से प्रतिमाह लगभग 37 से 40 हजार रुपये की शोध फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। उनकी इस सफलता से धरोटी गांव सहित पूरे राजगढ़ क्षेत्र में खुशी की लहर है।

यही नहीं, संगड़ाह उपमंडल के टिकरी गांव की सीमा देवी की कहानी भी किसी प्रेरणास्त्रोत से कम नहीं है, जिन्होंने दो छोटे बच्चों की परवरिश और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच पहले ही प्रयास में यूजीसी नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। सीमा की सफलता संघर्ष और संकल्प की जीवंत मिसाल है। बचपन में पिता का निधन हो जाने के बावजूद उनकी मां ने शिक्षा की राह नहीं टूटने दी। बड़ग जमा दो विद्यालय की मेधावी छात्रा रहीं सीमा का नाम प्लस-टू की टॉपर सूची में दर्ज हुआ और उन्हें लैपटॉप भी मिला। वर्ष 2018 में विवाह के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और वर्ष 2019 में राजकीय महाविद्यालय संगड़ाह से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद पति रामानंद के सहयोग से जेबीटी, बीएड और हिंदी विषय में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। हाल ही में घोषित यूजीसी नेट परिणाम में उनकी सफलता से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और ग्रामीण महिलाएं उन्हें प्रेरणा के रूप में देख रही हैं।

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वहीं, शैलेंद्र हितैषी की दिन-रात की मेहनत भी रंग लाई। उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) पहले ही प्रयास में उतीर्ण करके समूची पझौता घाटी का नाम रोशन किया है। शैलेंद्र ने बताया कि उन्होंने नेट परीक्षा के लिए कोई कोचिंग नहीं ली, बल्कि अपने स्तर पर ही घर पर परीक्षा की तैयारी की। शैलेंद्र हितैषी मूलतः राजगढ़ उप मंडल की पझौता घाटी के गांव मानवा के रहने वाले हैं। उन्होंने आठवीं तक की शिक्षा अपने पैतृक गांव मानवा से ग्रहण की। इसके बाद उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजगढ़ से 12वीं और बीए की उपाधि भी राजगढ़ डिग्री कॉलेज से हासिल की। शैलेंद्र को संगीत का शौक बचपन से ही था, जिसकी दीक्षा इन्हें घुट्टी में अपनी माता मीरा हितैषी से मिली, जो आकाशवाणी से भी अनुमोदित पहाड़ी कलाकार रही है, जबकि इनके पिता सुखदेव हितैषी एक किसान हैं।

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कॉलेज में भी इन्होंने म्यूजिक विषय को अनिवार्य रूप से रखा और बीए उतीर्ण करने के उपरांत अब शैलेंद्र हिमाचल विश्वविद्यालय से संगीत में एमए कर रहे हैं। इन्होंने संगीत में अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता परिवार अलावा विशेषकर राजगढ़ कॉलेज की संगीत की प्रोफेसर डॉ. सविता सहगल और नीरजा सहगल को दिया है। उन्होंने बताया कि उनका सपना संगीत में सहायक प्रोफेसर बनना है, जिसके लिए उन्होंने नेट परीक्षा पास करने के लिए दिन-रात मेहनत की है। उनका लक्ष्य संगीत में पीएचडी करना है, ताकि सिरमौर की प्राचीन संस्कृति और पारंपरिक लोकगीतों का संरक्षण कर सकें।