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चार लेबर कोड के विरोध में सीटू का जोरदार प्रदर्शन, नाहन में केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी

नाहन में रैली का नेतृत्व सीटू राज्य सचिव आशीष कुमार और जिला उपाध्यक्ष इंदु तोमर ने किया। सभा को संबोधित करते हुए आशीष कुमार ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड श्रमिक वर्ग के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है। इन कोडों के माध्यम से नौकरी की सुरक्षा खत्म की जा रही है।

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नाहन : केंद्र सरकार की चार लेबर कोड और कथित मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में सीटू जिला सिरमौर के बैनर तले गुरुवार को नाहन, शिलाई और राजगढ़ में व्यापक प्रदर्शन हुए। जिला मुख्यालय नाहन में मुख्य रैली आयोजित की गई। ये रैली मुख्य बस स्टैंड से शुरू होकर बड़ा चौक और दिल्ली गेट होते हुए डीसी कार्यालय पहुंची। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।

नाहन में रैली का नेतृत्व सीटू राज्य सचिव आशीष कुमार और जिला उपाध्यक्ष इंदु तोमर ने किया। सभा को संबोधित करते हुए आशीष कुमार ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड श्रमिक वर्ग के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है। इन कोडों के माध्यम से नौकरी की सुरक्षा खत्म की जा रही है। ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है और ट्रेड यूनियनों के अधिकार सीमित किए जा रहे हैं। आशीष कुमार ने एलआईसी, बैंकों और बिजली क्षेत्र के निजीकरण को देश की आर्थिक संप्रभुता पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं को कॉर्पोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों की नौकरी और आम जनता की बचत दोनों खतरे में हैं।

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उन्होंने किसानों की बदहाल स्थिति, बढ़ती लागत और फसलों के उचित मूल्य न मिलने की समस्या को उठाते हुए कहा कि सरकार की नीतियां किसानों और मजदूरों दोनों के खिलाफ हैं। अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ और भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों को उन्होंने देश की आत्मनिर्भरता और किसानों-मजदूरों के हितों पर आघात बताया। विशेष रूप से 108 और 102 एंबुलेंस कर्मियों की समस्याओं को उठाते हुए आशीष कुमार ने कहा कि ये कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें न्यूनतम वेतन, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन कर्मियों की मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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सीटू जिला उपाध्यक्ष इंदु तोमर, देव कुमारी, शीला ठाकुर ने अपने संबोधन में आंगनबाड़ी और मिड-डे मील कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर, मिड-डे मील वर्कर वर्षों से बेहद कम मानदेय पर काम कर रही हैं, लेकिन सरकार उन्हें कर्मचारी का दर्जा देने और न्यूनतम वेतन लागू करने से बच रही है। इंदु तोमर ने कहा कि महिला कार्यकर्ताओं के साथ यह दोहरा अन्याय है। एक ओर उनसे पूर्णकालिक काम लिया जाता है, दूसरी ओर उन्हें सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और नियमित वेतन से वंचित रखा जाता है। उन्होंने मांग की कि आंगनबाड़ी और मिड-डे मील कर्मियों को तुरंत सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और सम्मानजनक वेतन सुनिश्चित किया जाए।

सभा को एआईटीयूसी के राज्य कोषाध्यक्ष अनूप प्रशार, आंगनबाड़ी यूनियन की जिला सचिव देव कुमारी, नाहन प्रोजेक्ट अध्यक्ष सुमन ठाकुर, महासचिव शीला, सराहां प्रोजेक्ट से वंदना, शमा, ममता, अनुराधा, संगडाह प्रोजेक्ट से नीलम, शीला, हिमाचल किसान सभा के जिला अध्यक्ष सतपाल मान और सीटू के पूर्व कोषाध्यक्ष धनी राम शर्मा, 108 /102 यूनियन  के जिला अध्यक्ष सुरजीत, विशाल, राकेश सहित अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि चार लेबर कोड वापस नहीं लिए गए, निजीकरण की नीतियां बंद नहीं की गईं और मजदूर किसान विरोधी फैसले रद्द नहीं किए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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