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मोबाइल-इंटरनेट से लेकर रसोई के अनाज तक… 2027 की जनगणना में पूछे जाएंगे ये 34 सवाल, तैयार होगा डिजिटल डाटा

हिमाचल प्रदेश में होने वाली अगली जनगणना के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं और इस बार की जनगणना कई मायनों में खास रहने वाली है। इस प्रक्रिया के तहत लोगों से कुल 34 सवाल पूछे जाएंगे और पहली बार प्रदेश का पूरा डाटा डिजिटल रूप में तैयार किया जाएगा।

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शिमला : हिमाचल प्रदेश में होने वाली अगली जनगणना के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं और इस बार की जनगणना कई मायनों में खास रहने वाली है। इस प्रक्रिया के तहत लोगों से कुल 34 सवाल पूछे जाएंगे और पहली बार प्रदेश का पूरा डाटा डिजिटल रूप में तैयार किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार जनगणना का काम 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा। पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। हर दस साल में जनगणना होती है, लेकिन वर्ष 2021 में कोविड महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था।

जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास जनगणना की जाएगी, जो 12 मई से 11 जून तक चलेगी। इस दौरान मकानों की संख्या, उनके प्रकार और उपलब्ध सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी, जिसमें व्यक्तियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार मुख्य जनगणना मार्च 2027 में की जाएगी।

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इस बार जनगणना के दौरान लोगों को अपने घर और परिवार से जुड़ी कई जानकारियां देनी होंगी। इसमें स्मार्टफोन, इंटरनेट, कंप्यूटर और लैपटॉप जैसी डिजिटल सुविधाओं के बारे में भी पूछा जाएगा। इसके अलावा परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज से लेकर कई अन्य घरेलू सुविधाओं की जानकारी भी एकत्र की जाएगी, जिससे प्रदेश का व्यापक डिजिटल डाटा तैयार किया जा सके।

जनगणना में भवन नंबर, जनगणना मकान नंबर, मकान के फर्श, दीवार और छत में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री, मकान के उपयोग और उसकी स्थिति के बारे में जानकारी ली जाएगी। इसके साथ ही परिवार क्रमांक, परिवार में सामान्यतः रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या, परिवार के मुखिया का नाम और लिंग, परिवार के मुखिया का अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य वर्ग से संबंध, मकान के स्वामित्व की स्थिति, रहने के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या और परिवार में रहने वाले विवाहित दंपतियों की संख्या से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।

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इसके अलावा पेयजल का मुख्य स्रोत और उसकी उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय की सुलभता और उसका प्रकार, गंदे पानी की निकासी, स्नानगृह की उपलब्धता, रसोईघर और एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन की स्थिति तथा खाना पकाने के लिए प्रयुक्त ईंधन के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी। परिवार के पास रेडियो या ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट सुविधा, कंप्यूटर या लैपटॉप, टेलीफोन, मोबाइल फोन या स्मार्टफोन जैसी सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में भी पूछा जाएगा। इसके साथ ही साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल या मोपेड, कार, जीप या वैन जैसी परिवहन सुविधाओं और परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज तथा मोबाइल नंबर से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

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अधिकारियों का कहना है कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था के साथ की जाएगी, जिससे डाटा अधिक सटीक तरीके से एकत्र किया जा सकेगा। उनका मानना है कि यदि डाटा सटीक होगा तो सरकारी योजनाएं भी अधिक प्रभावी बनेंगी और उनका लाभ सही तरीके से पात्र लोगों तक पहुंच सकेगा।