शिमला : हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू अपने कार्यकाल का चौथा बजट पेश कर रहे हैं। उन्होंने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों पर फोकस करते हुए दूध और अदरक समेत कई उत्पादों पर MSP और कीमतों में बढ़ोतरी की बड़ी घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में पशुपालन और कृषि क्षेत्र को बड़ा सहारा देते हुए गाय के दूध का क्रय मूल्य 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का मूल्य 61 से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर करने की घोषणा की। इसके साथ ही प्रदेश में पहली बार अदरक की खरीद के लिए 30 रुपये प्रति किलो MSP लागू करने का ऐलान किया गया। प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों में गेहूं का MSP 60 से 80 रुपये, मक्की 40 से 50 रुपये, पांगी का जौ 60 से 80 रुपये और हल्दी 90 से 150 रुपये प्रति किलो करने की घोषणा भी की गई।
मछुआरों को भी इस बजट में खास जगह दी गई है। मुख्यमंत्री ने जलाशयों की मछली खरीद के लिए 100 रुपये प्रति किलो MSP देने और मुख्यमंत्री मछुआरा सहायता योजना शुरू करने की घोषणा की। इसके तहत मछुआरों को अनुदान भी दिया जाएगा और वोट की खरीद पर 70 फीसदी सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। किसानों के लिए सरकार ने राज्य किसान आयोग के गठन की घोषणा की है। साथ ही पारंपरिक बीजों को बढ़ावा देने के लिए बीज गांव स्थापित किए जाएंगे, जहां किसानों को सब्सिडी का लाभ मिलेगा। कृषि सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री खेत बाड़बंदी योजना के तहत 10 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।
पशुपालन क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव रखा गया है। चरवाहों के लिए डिजिटल कार्ड और जीवन बीमा सुविधा दी जाएगी, जबकि भेड़पालन के लिए 300 करोड़ रुपये की योजना शुरू करने का ऐलान किया गया है। इसके अलावा 100 नई ट्राउट इकाइयां स्थापित करने और हमीरपुर में 25 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क बनाने की घोषणा भी की गई। मुख्यमंत्री ने अधूरे पड़े 300 कार्यों को पूरा करने के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की घोषणा की और कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सरकार अपनी सभी गारंटियों को पूरा करेगी। वर्ष 2026-27 के लिए बजट आकार 54,928 करोड़ रुपये रखा गया है, जो चालू वित्त वर्ष के 58,514 करोड़ रुपये से कम है।
बजट भाषण के दौरान सियासी माहौल भी गरमाया रहा। भाजपा पर टिप्पणी से नाराज विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंचकर हंगामा किया, जिससे मुख्यमंत्री को अपना भाषण बीच में रोकना पड़ा। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के हस्तक्षेप के बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन नारेबाजी जारी रही। मुख्यमंत्री ने केंद्र से मिलने वाली मदद को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि आरडीजी बंद होने और आर्थिक दबाव के बावजूद सरकार अपने फैसलों से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड और असम जैसे राज्यों से हिमाचल की तुलना नहीं की जा सकती और फिजूलखर्ची रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।



