शिमला : हिमाचल प्रदेश के बजट 2026-27 को लेकर विपक्ष ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं ने इसे विकास के बजाय आर्थिक संकट का बजट करार देते हुए सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि ₹54,928 करोड़ का यह बजट पिछले वर्ष के ₹58,514 करोड़ से कम है, जो साफ तौर पर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के सिकुड़ने का संकेत देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को अपनी वित्तीय विफलता स्वीकार करते हुए कर्मचारियों का वेतन तक स्थगित करना पड़ा है। महाजन ने कहा कि एक तरफ वेतन रोका जा रहा है और दूसरी तरफ छोटे-छोटे मानदेय बढ़ाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक यह बजट विकास का नहीं, बल्कि “वित्तीय दिवालियापन का दस्तावेज” है।
राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने भी सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 100% गारंटी पूरी करने की बात दोहराई जा रही है, जबकि तीन साल में एक भी बड़ी गारंटी जमीन पर नहीं उतरी। उन्होंने कर्मचारियों के वेतन में 3% से लेकर 50% तक के स्थगन को प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति का प्रमाण बताया और कहा कि जब सरकार खुद वेतन नहीं दे पा रही, तो विकास कैसे करेगी।
लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप ने बजट को किसान, जवान और गरीब विरोधी बताते हुए कहा कि दूध और फसलों के एमएसपी बढ़ाने की घोषणा केवल कागजों तक सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को न तो सही भुगतान मिल रहा है और न ही मार्केट सपोर्ट। साथ ही 1 लाख गरीब परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा को भी उन्होंने चुनावी स्टंट करार दिया और कहा कि “घोषणाओं की खेती हो रही है, लेकिन किसानों के खेत सूखे हैं।”
लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेल दिया है और अब वेतन स्थगन जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में कोई ठोस आर्थिक रोडमैप नहीं है और केवल घोषणाओं के जरिए जनता को गुमराह किया जा रहा है। उनके अनुसार यह “कांग्रेस का मैनेजमेंट ऑफ फेल्योर” है।
लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने भी सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि वित्तीय अनुशासन के नाम पर अधिकारियों का वेतन रोक दिया गया, लेकिन खर्च को लेकर कोई स्पष्ट नीति नजर नहीं आती। उन्होंने इसे सरकार की असफल आर्थिक नीति का बड़ा उदाहरण बताया और कहा कि जनता से बलिदान मांगने वाली सरकार खुद जवाबदेही से बच रही है।
लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने महिलाओं और युवाओं को लेकर किए गए वादों पर निशाना साधते हुए कहा कि ₹1500 देने की घोषणा के बावजूद तीन साल में कोई वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय केवल ट्रेनिंग और भत्तों के नाम पर बहलाया जा रहा है। उनके मुताबिक यह बजट उम्मीद नहीं, बल्कि निराशा और धोखे का प्रतीक है।



