शिमला : मुंबई में आयोजित इंडियन पैनोरमा के राष्ट्रीय फिल्म उत्सव में डॉ. संजीव अत्री की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘सोंधी धरती मीठा गुड़’ को सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक डॉक्यूमेंट्री फिल्म के पुरस्कार से नवाजा गया है। 22 से 25 मार्च तक चले इस प्रतिष्ठित फिल्म उत्सव में देशभर से आई 583 प्रविष्टियों में से केवल 27 फिल्मों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया, जिनमें अत्री की यह फिल्म भी शामिल रही।
डॉ. संजीव अत्री को इस उपलब्धि के लिए 25,000 रुपये की पुरस्कार राशि, प्रमाण पत्र और ट्रॉफी प्रदान की गई। 23 मिनट 14 सेकंड की यह डॉक्यूमेंट्री भारत में गुड़ के इतिहास और उसके पारंपरिक राष्ट्रीय महत्व को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती है। फिल्म का निर्माण भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के लिए किया गया है और इसका निर्देशन स्वयं डॉ. अत्री ने किया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में भी इस फिल्म को हैदराबाद में भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, जिससे इसकी विषयवस्तु और प्रस्तुति की गुणवत्ता पहले ही प्रमाणित हो चुकी है।
बता दें कि डॉ. संजीव अत्री लंबे समय से शैक्षणिक फिल्मों के पटकथा लेखन और निर्देशन से जुड़े हुए हैं। हाल ही में उन्होंने संस्कृति मंत्रालय के लिए ‘काष्ठ पुष्पा’ नामक फिल्म का निर्माण किया है, जो सहारनपुर की ऐतिहासिक काष्ठ कला और उसकी पारंपरिक तकनीकी विशेषताओं को दर्शाती है।
डा. संजीव अत्री जिला सिरमौर के नाहन के रहने वाले हैं। हिमाचल के शिक्षा विभाग में 35 साल सेवाएं देने के बाद हाल ही में वह सिरमौर के टोकियो स्कूल से बतौर प्रिंसिपल सेवानिवृत्त हुए। इस अवधि में उन्होंने कई शैक्षणिक लघु फिल्मों का निर्माण किया, जो सीधे तौर पर बच्चों की शिक्षा से जुड़ी हैं।
उन्होंने हेलो मोगीनंद रेडियो स्टेशन का निर्माण किया, जो हिमाचल का पहला शैक्षणिक रेडियो स्टेशन है। इसके साथ साथ सिरमौर के ही औरंगाबाद सरकारी स्कूल में दुनिया का सबसे बड़ा यानी 20 फीट लंबा स्याही वाला पेन स्थापित करने का कीर्तिमान भी उनके नाम है। मौजूदा समय में अत्री अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल नाहन में डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं। शिक्षा विभाग में सेवाओं के दौरान उनकी उपलब्धियों की फेहरिस्त काफी लंबी है।
डॉ. अत्री ने बताया कि जुलाई में वह भारत सरकार की एक और फिल्म ‘सुगंध नगरी’ की शूटिंग पूरी करने जा रहे हैं। यह फिल्म उत्तर प्रदेश के कन्नौज शहर में विश्व प्रसिद्ध इत्र निर्माण की पारंपरिक तकनीक, उसके 700 वर्षों के इतिहास और आज तक उसकी निरंतरता को दर्शाएगी।



