अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को लगभग आधी सदी से जारी हिंसा का जवाब बताते हुए साफ कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। राष्ट्र के नाम करीब 20 मिनट के संबोधन में ट्रंप ने अमेरिकी कार्रवाई की जमकर तारीफ की और नागरिकों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने इस युद्ध को अमेरिकियों के सुरक्षित भविष्य के लिए जरूरी निवेश करार दिया।
यह संबोधन 28 फरवरी से जारी संघर्ष के दौरान ईरान को केंद्र में रखकर ट्रंप का पहला राष्ट्र के नाम संदेश था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अपने प्रमुख रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के करीब है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि आने वाले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। ट्रंप ने ईरान के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाने की चेतावनी भी दी और कहा कि जरूरत पड़ी तो और अहम ठिकानों पर नजर रखी जाएगी।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान का नया नेतृत्व पहले के मुकाबले कम कट्टरपंथी और ज्यादा समझदार है, लेकिन अगर किसी तरह का समझौता नहीं होता है तो सैन्य विकल्प खुले रहेंगे।
इस बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। ब्रिटेन में जल्द एक अहम बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत समेत करीब 35 देश हिस्सा लेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सुचारु रूप से खोलने पर चर्चा करना है। भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी इसमें शामिल होंगे। गौरतलब है कि दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल का परिवहन इसी स्ट्रेट के जरिए होता है, ऐसे में इसका बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।
