नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद तीखा रुख अपनाते हुए अपनी ही पार्टी और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने साफ कहा, खामोश किया गया हूं, लेकिन हारा नहीं हूं। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि क्या उन्हें इसलिए बोलने से रोका जा रहा है, क्योंकि वह सदन में आम आदमी के मुद्दे उठाते हैं। उन्होंने अपने संदेश को शायराना अंदाज में पेश करते हुए कहा, मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वह दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।
राघव चड्ढा ने शुक्रवार को संसद के बाहर खड़े होकर एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें जब भी बोलने का मौका मिला, उन्होंने हमेशा जनता से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने पितृत्व अवकाश, खाद्य मिलावट, हवाई अड्डों पर महंगा खाना, टोल प्लाजा और टेलीकॉम कंपनियों जैसे विषयों का जिक्र करते हुए कहा कि ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर आमतौर पर संसद में चर्चा नहीं होती। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई गलती है और क्या इसी वजह से उन्हें बोलने से रोका जा रहा है।
कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी और ‘युवा तुर्क’ माने जाने वाले राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में रहे हैं। वह 2012-13 के इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन से जुड़े और फिर पार्टी में तेजी से उभरे। 2015 में वित्त मंत्री के सलाहकार, 2016 में राष्ट्रीय प्रवक्ता और 2020 में राजेंद्र नगर से विधायक बने। बाद में उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा गया। 2 अप्रैल 2026 को उन्हें उपनेता सदन के पद से हटा दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आम आदमी पार्टी ने भी पलटवार करते हुए राघव चड्ढा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि चड्ढा कई मामलों में पार्टी लाइन के अनुसार नहीं चल रहे थे और संसद में अहम मुद्दों से किनारा कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वह विपक्ष के बहिर्गमन में शामिल नहीं हुए और पंजाब से जुड़े मुद्दों को भी पर्याप्त रूप से नहीं उठाया। भारद्वाज ने यहां तक कहा कि बड़े राष्ट्रीय मुद्दों के समय समोसे जैसे विषयों पर बात करना प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए।
वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी चड्ढा पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि जो नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरता हो, क्या वह देश के लिए मजबूती से लड़ सकता है। इस बयानबाजी से साफ है कि आम आदमी पार्टी के भीतर यह विवाद अब खुलकर सामने आ गया है।
