पटना : बिहार के पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने छात्रों को संबोधित करते हुए “राष्ट्र प्रथम” को जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें और बदलती दुनिया में जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने चंपारण के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह वही भूमि है जहां महात्मा गांधी एक बैरिस्टर से जन नेता बने और चंपारण सत्याग्रह ने सत्य, साहस और न्याय के जरिए देश की चेतना को जागृत किया। उन्होंने कहा कि बिहार महान विचारों और परिवर्तनकारी आंदोलनों की भूमि रहा है।
बिहार की बौद्धिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसी धरती पर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई, नालंदा जैसे विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय ने शिक्षा का वैश्विक मानदंड स्थापित किया और चाणक्य जैसे महान विचारक यहीं से उभरे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय का नामकरण अपने आप में गांधीजी के सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास और नैतिक नेतृत्व के आदर्शों का प्रतीक है। उन्होंने महारानी जानकी कुंवर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके भूमि दान और परोपकार ने इस क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार को मजबूत आधार दिया।
उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, नए एकीकृत पाठ्यक्रमों की शुरुआत और भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र की स्थापना की सराहना की। साथ ही खेल और फिटनेस को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर छात्राएं शीर्ष स्थान हासिल कर रही हैं, जो महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का संकेत है।
छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह अंत नहीं बल्कि सीखने की नई शुरुआत है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों को भविष्य का आधार बताते हुए युवाओं से इन तकनीकों का जिम्मेदारी से उपयोग करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने युवाओं से मादक द्रव्यों के सेवन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि गांधीजी का अहिंसा का सिद्धांत आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है, चाहे वह वास्तविक जीवन हो या डिजिटल दुनिया।
