सराहां : जिला सिरमौर के पच्छाद उपमंडल स्थित भूर्शिंग महादेव मंदिर परिसर में आयोजित आठ दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ कथा का रविवार को विधिवत समापन हो गया। कथा के आठ दिनों के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
कथा के अंतिम एवं आठवें दिन कथावाचक आचार्य चंद्रशेखर चंडी वाले ने श्रद्धालुओं को महाभारत युद्ध का प्रसंग, सुदामा चरित्र, महाराजा परीक्षित की कथा, यादवों के सर्वनाश तथा भगवान श्रीकृष्ण के देहावसान का वृतांत सुनाया। कथा के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा और भक्त कथा रस में सराबोर दिखाई दिए।
आचार्य ने बताया कि कुरुक्षेत्र में 18 दिनों तक चला महाभारत का युद्ध अधर्म के विनाश, अहंकार के अंत और धर्म की स्थापना का प्रतीक है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन के सारथी बनकर धर्मयुद्ध का मार्गदर्शन करने की कथा भी विस्तार से सुनाई।
कथा के दौरान सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण की मित्रता का भावुक प्रसंग भी सुनाया गया। आचार्य ने बताया कि अत्यंत साधारण अवस्था में द्वारिका पहुंचे सुदामा का भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं स्वागत किया और अपने सखा को गले लगाकर सम्मान दिया। इस प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
इसके अलावा महाराजा परीक्षित को श्रीमद् भागवत कथा श्रवण और तक्षक नाग के डसने से हुई मृत्यु का प्रसंग भी विस्तार से बताया गया। कथा के अंतिम चरण में यादव वंश के विनाश और भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी लोक से प्रस्थान का वृतांत सुनाया गया।
बता दें कि श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ कथा मोहाना निवासी एवं सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ता जेएस अत्री और उनके पुत्र अधिवक्ता विवेक अत्री ने अपने परिजनों के साथ क्षेत्र की सुख-समृद्धि और प्रदेश के जनकल्याण की कामना से आयोजित करवाई थी। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
