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भूर्शिंग महादेव मंदिर में गूंजी श्रीकृष्ण की लीलाएं, गोवर्धन पूजा और रुक्मणी विवाह के प्रसंगों से निहाल हुए श्रद्धालु

जिला सिरमौर के पच्छाद उपमंडल स्थित भूर्शिंग महादेव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ के सातवें दिन शनिवार को सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। कथा वाचक आचार्य चंद्रशेखर चंडी वाले ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए भक्तों को कथा रसपान करवाया।

सराहां (सिरमौर) : जिला सिरमौर के पच्छाद उपमंडल स्थित भूर्शिंग महादेव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ के सातवें दिन शनिवार को सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। कथा वाचक आचार्य चंद्रशेखर चंडी वाले ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए भक्तों को कथा रसपान करवाया।

कथा के दौरान गिरिराज गोवर्धन पर्वत को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपनी उंगली पर उठाने, मथुरा पहुंचकर महाराज कंस का वध करने, जरासंध को 17 बार पराजित करने, द्वारका पहुंचने और रुक्मणी विवाह के प्रसंग सुनाए गए। आचार्य ने बताया कि गोवर्धन लीला अहंकार के नाश और प्रकृति पूजन का संदेश देती है। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा करने के लिए प्रेरित किया था। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने मूसलाधार वर्षा की, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठाकर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की।

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कथा में मथुरा पहुंचने के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारा शिव धनुष भंग करने और अत्याचारी मामा कंस के वध का प्रसंग भी सुनाया गया। इसके अलावा श्रीकृष्ण और रुक्मणी विवाह की भव्य लीला का वर्णन करते हुए बताया गया कि द्वारका में पूरे विधि-विधान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ दोनों का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ।

बता दें कि पच्छाद के मोहाना निवासी एवं सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ता जेएस अत्री और उनके पुत्र अधिवक्ता विवेक अत्री अपने परिजनों के साथ क्षेत्र की सुख-समृद्धि और प्रदेश के जनकल्याण की कामना से इस श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ का आयोजन करवा रहे हैं।

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रविवार को कथा के अंतिम दिन पांच और कथाओं का श्रवण करवाया जाएगा। कार्यक्रम के तहत सुबह 10 बजे हवन यज्ञ एवं पूर्णाहुति होगी। इसके बाद सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक कथा प्रवचन आयोजित किया जाएगा, जबकि दोपहर 1 बजे से देर शाम तक श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का प्रसाद वितरित किया जाएगा।

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