शिमला : हिमाचल सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य कर दिया है। ये योग्यता 31 अगस्त 2028 तक हासिल करनी ही होगी। तय समय सीमा तक टेट उत्तीर्ण नहीं करने वाले शिक्षकों की नौकरी पर संकट भी खड़ा हो सकता है। ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की अनुपालना में जारी किया गया है। वहीं, आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सख्ती शुरू कर दी है।
सचिव शिक्षा राकेश कंवर ने स्कूल शिक्षा निदेशक को निर्देश दिए हैं कि बिना टेट वाले सभी शिक्षकों की सूची तैयार कर उन्हें 31 अगस्त 2028 तक टेट उत्तीर्ण कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले और समीक्षा याचिका पर दिए आदेश में इन-सर्विस शिक्षकों को अतिरिक्त समय देने के साथ राज्यों को वर्ष में दो बार टेट परीक्षा आयोजित करने के निर्देश भी दिए हैं।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ऐसे 8,727 शिक्षक हैं, जिन्होंने अभी तक टेट पास नहीं किया है। शिक्षा विभाग के अनुसार इनमें 5,552 जेबीटी, 853 एचटी, 459 सीएचटी, 377 सीएंडवी और 1,486 टीजीटी शामिल हैं। इन सभी का सेवाकाल पांच वर्ष या उससे अधिक शेष है और इनकी नियुक्तियां वर्ष 2010 से पहले हुई थीं।
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 के तहत यह प्रावधान लागू हुआ था, जबकि हिमाचल प्रदेश में टेट परीक्षा वर्ष 2010 से शुरू हुई। इससे पहले नियुक्त हुए शिक्षक टेट उत्तीर्ण नहीं हैं, हालांकि इनमें से कई शिक्षक अब सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।