रिकांगपिओ (किन्नौर) : हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा किन्नर कैलाश यात्रा-2026 पर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है।
हिमाचल प्रदेश के हजारों श्रद्धालु 1 जुलाई से शुरू होने वाली इस पवित्र यात्रा का इंतजार कर रहे थे, लेकिन यात्रा मार्ग पर बढ़ते प्राकृतिक खतरों को देखते हुए जिला प्रशासन किन्नौर ने यात्रा को अगले आदेशों तक स्थगित कर दिया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से फिलहाल यात्रा पर न आने और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
दरअसल, किन्नर कैलाश यात्रा का आयोजन पहले 1 जुलाई से 30 जुलाई तक प्रस्तावित था। यात्रा शुरू होने से पहले मार्ग की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए 21 जून को वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में एक विशेष रैकी टीम भेजी गई थी।
टीम ने पूरे मार्ग का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी, जिसमें कई स्थानों पर गंभीर खतरे होने की बात सामने आई। इसी रिपोर्ट के आधार पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार मिलिंग खटा से शिवलिंग तक के रास्ते में कई बड़े ग्लेशियर मौजूद हैं। इन ग्लेशियरों पर भारी चट्टानें और बोल्डर अस्थिर स्थिति में हैं, जो किसी भी समय गिर सकते हैं। वहीं गुफा से सोरंग के बीच कई स्थानों पर बोल्डर गिरने से मार्ग प्रभावित हुआ है। बढ़ते तापमान के कारण बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे भूस्खलन और मलबा गिरने का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
प्रशासन ने बताया कि मिलिंग खटा से पवित्र गुफा तक का रात्रिकालीन मार्ग मौजूदा परिस्थितियों में बेहद जोखिमपूर्ण है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए यात्रा को फिलहाल रोकना आवश्यक समझा गया।
किन्नर कैलाश यात्रा आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं एसडीएम प्रवीण कुमार भारद्वाज ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि हालात सामान्य होने तक यात्रा का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं, बचाव दल और आपदा राहत टीमों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौसम और यात्रा मार्ग की स्थिति में सुधार होने के बाद दोबारा समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही यात्रा शुरू करने को लेकर अगला निर्णय लिया जाएगा। तब तक बिना अनुमति या आधिकारिक सूचना के कोई भी श्रद्धालु यात्रा मार्ग की ओर न जाए।
