नाहन : रविवार दोपहर बाद हुई बारिश ने एक बार फिर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। तेज बारिश और तूफान के बीच इमरजेंसी वार्ड की सीलिंग का एक हिस्सा टूट गया और वार्ड में पानी भर गया। इससे वार्ड में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस मेडिकल कॉलेज की छत ही ठीक नहीं, वहां मरीजों की हालत कैसी हो सकती है। राहत की बात यह रही कि सीलिंग का हिस्सा किसी मरीज पर नहीं गिरा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
दरअसल, हर बारिश के साथ मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी की वही पुरानी तस्वीर सामने जा रही है। यह पहली बार नहीं है जब बारिश के दौरान मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी वार्ड में इस तरह की स्थिति बनी हो। इससे पहले भी कई बार सीलिंग से पानी टपकने और छत के हिस्से टूटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बावजूद इसके समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि हर बरसात के साथ मरीजों और स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश का पानी वार्ड के भीतर पहुंचने से इलाज व्यवस्था भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हर बरसात में इमरजेंसी वार्ड की यही हालत होती है तो आखिर इस समस्या का स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं किया गया? इमरजेंसी जैसे संवेदनशील वार्ड में बार-बार इस तरह की घटनाएं मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
इस संबंध में मेडिकल कॉलेज की एमएस से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
